इंदौर बना लगातार 8वीं बार भारत का सबसे स्वच्छ शहर, जानिए कौन-कौन से शहर रहे टॉप 10 में
🇮🇳 राष्ट्रपति ने किया विजेताओं को सम्मानित
नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 के विजेताओं को सम्मानित किया। इस वर्ष का सर्वेक्षण कई मायनों में खास रहा – जहां बड़े शहरों में इंदौर की बादशाहत बरकरार रही, वहीं 3-10 लाख आबादी वर्ग में नोएडा, चंडीगढ़ और मैसूर जैसे शहरों ने भी शानदार प्रदर्शन किया।
🧹 लगातार 8वीं बार सबसे स्वच्छ शहर बना इंदौर
मध्य प्रदेश का इंदौर लगातार आठवीं बार भारत का सबसे स्वच्छ शहर बना है। इसकी सफाई व्यवस्था, जनभागीदारी और तकनीकी इस्तेमाल ने एक बार फिर इसे नंबर 1 बनाया।
इंदौर की स्वच्छता अब एक ब्रांड बन चुकी है, जिससे बाकी शहरों को सीखने की जरूरत है।
🌇 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले टॉप 10 शहर
| रैंक | शहर | राज्य |
|---|---|---|
| 1 | इंदौर | मध्य प्रदेश |
| 2 | सूरत | गुजरात |
| 3 | नवी मुंबई | महाराष्ट्र |
| 4 | विशाखापट्टनम | आंध्र प्रदेश |
| 5 | भोपाल | मध्य प्रदेश |
| 6 | विजयवाड़ा | आंध्र प्रदेश |
| 7 | अहमदाबाद | गुजरात |
| 8 | नासिक | महाराष्ट्र |
| 9 | राजकोट | गुजरात |
| 10 | ग्रेटर हैदराबाद | तेलंगाना |
🏙️ 3 से 10 लाख की जनसंख्या वाले शहरों में टॉप 5
| रैंक | शहर | राज्य |
|---|---|---|
| 1 | नोएडा | उत्तर प्रदेश |
| 2 | चंडीगढ़ | केंद्र शासित क्षेत्र |
| 3 | मैसूर | कर्नाटक |
| 4 | अमरावती | महाराष्ट्र |
| 5 | रायपुर | छत्तीसगढ़ |
🤝 नोएडा और चंडीगढ़ की बड़ी छलांग
इस बार नोएडा ने स्वच्छता के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाते हुए अपने वर्ग में पहला स्थान प्राप्त किया है। यही नहीं, चंडीगढ़ भी अपनी योजनाओं और नागरिक भागीदारी के चलते दूसरे स्थान पर रहा।
नोएडा में हर सेक्टर में डोर-टू-डोर वेस्ट कलेक्शन, प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट और स्मार्ट डस्टबिन्स का प्रयोग आम हो गया है।
📊 स्वच्छ सर्वेक्षण के मापदंड
स्वच्छ सर्वेक्षण की रैंकिंग कुछ मुख्य आधारों पर तय की जाती है:
-
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (कचरा निपटान)
-
ओपन डेफिकेशन फ्री (ODF++) स्टेटस
-
जनभागीदारी और नागरिक फीडबैक
-
डिजिटल ट्रैकिंग और रिपोर्टिंग
-
इनफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और इनोवेशन
🌏 क्यों यह रैंकिंग भारत के लिए मायने रखती है?
भारत जैसे बड़े और जनसंख्या-बहुल देश में शहरी स्वच्छता एक बड़ी चुनौती है। यह रैंकिंग सिर्फ पहचान नहीं, बल्कि शहरों के लिए एक मोटिवेशन है। इससे राज्य सरकारें और नगर निगम न केवल जागरूक होते हैं बल्कि बजट और फंडिंग में भी फायदा मिलता है।
🚫 किन शहरों को करना होगा और सुधार?
हालांकि टॉप 10 की सूची गर्व की बात है, लेकिन कई बड़े शहर जैसे कि दिल्ली, कानपुर, पटना, और लखनऊ इस सूची में अपनी जगह नहीं बना पाए। इन शहरों को कचरा निपटान और जनभागीदारी में सुधार की सख्त जरूरत है।
📢 निष्कर्ष: इंदौर से सीखें और आगे बढ़ें
इंदौर की लगातार 8वीं जीत भारत के हर शहर के लिए एक प्रेरणा है कि इच्छाशक्ति, नागरिक भागीदारी और तकनीक की मदद से कैसे कोई भी शहर स्वच्छता का मॉडल बन सकता है।
सरकार की ओर से इस प्रयास को और बढ़ावा देने के लिए नई योजनाएं और फंडिंग के संकेत भी दिए गए हैं।
🔧 कौन से शहर रह गए पीछे?
जहां कई शहरों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया, वहीं दिल्ली, कानपुर, पटना, जयपुर जैसे बड़े शहर अब भी लिस्ट में पीछे हैं। इन शहरों को कचरा निपटान, सार्वजनिक शौचालयों और जनसहयोग में सुधार की आवश्यकता है।
🌟 स्वच्छता सिर्फ रैंकिंग नहीं, संस्कृति है
इंदौर, नोएडा और चंडीगढ़ जैसे शहर यह साबित कर चुके हैं कि सफाई सिर्फ सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि नागरिक जिम्मेदारी भी है। जिस दिन हर नागरिक अपने घर से लेकर गली तक सफाई को अपनाएगा, भारत दुनिया का सबसे साफ देश बन सकता है।नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 के विजेताओं को सम्मानित किया। इस वर्ष का सर्वेक्षण कई मायनों में खास रहा – जहां बड़े शहरों में इंदौर की बादशाहत बरकरार रही, वहीं 3-10 लाख आबादी वर्ग में नोएडा, चंडीगढ़ और मैसूर जैसे शहरों ने भी शानदार प्रदर्शन किया।
“सफाई की शुरुआत घर से होती है, लेकिन बदलाव पूरे शहर को चमका सकता है।”
इंदौर बना लगातार 8वीं बार भारत का सबसे स्वच्छ शहर, जानिए कौन-कौन से शहर रहे टॉप 10 में












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