गलवान के बाद PM मोदी की पहली चीन यात्रा: SCO समिट में दिखेगा नया कूटनीतिक समीकरण |
भारत और चीन के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण चल रहे रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, 2019 के बाद पहली बार चीन की यात्रा पर जाएंगे, और यह यात्रा इसलिए खास है क्योंकि यह गलवान झड़प (2020) के बाद उनकी पहली चीन यात्रा होगी। वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट 2025 में भाग लेने के लिए चीन पहुंचेंगे, जहां उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात भी संभावित है।
इस ब्लॉग में हम इस यात्रा के राजनीतिक, कूटनीतिक और सामरिक पहलुओं की गहराई से पड़ताल करेंगे।

1. पीएम मोदी की चीन यात्रा: क्यों है खास?
गलवान झड़प के बाद भारत और चीन के बीच कई मुद्दों पर गतिरोध रहा। दोनों देशों ने सैन्य और राजनयिक स्तर पर वार्ताएं कीं, लेकिन विश्वास की बहाली अब भी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच डिप्लोमैटिक रिलेशन रीसेट का संकेत मानी जा रही है।
2019 के बाद यह उनकी पहली आधिकारिक चीन यात्रा होगी और SCO समिट के मंच पर वे न सिर्फ भारत की आवाज़ उठाएंगे, बल्कि चीन के साथ संबंधों में संतुलन बनाने की भी कोशिश करेंगे।
2. PM मोदी और शी जिनपिंग: क्या हो सकती है बातचीत?
हालांकि SCO समिट बहुपक्षीय मंच है, लेकिन इसके इतर PM मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता की भी संभावना है। पिछले साल ब्रिक्स सम्मेलन (अक्टूबर 2024, रूस) में दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी, लेकिन उसमें कोई ठोस प्रगति नहीं दिखी।
इस बार दोनों नेताओं के बीच बातचीत के संभावित मुद्दे:
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LAC पर तनाव और सैन्य टुकड़ियों की वापसी
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व्यापार घाटा और सीमा व्यापार
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डिजिटल स्पेस और डेटा सुरक्षा
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मल्टीपोलर एशिया में भारत-चीन की भूमिका
3. SCO समिट 2025: भारत के लिए क्या है मायने?
SCO (Shanghai Cooperation Organisation) एक ऐसा मंच है जिसमें चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, ईरान समेत कई महत्वपूर्ण एशियाई देश शामिल हैं। यह मंच सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, और क्षेत्रीय सहयोग पर संवाद का अवसर देता है।
भारत SCO का एक सक्रिय सदस्य रहा है और उसकी प्राथमिकता रहती है:
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सीमा पार आतंकवाद पर कड़ा रुख
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क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सहयोग
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मध्य एशिया में ऊर्जा और व्यापार विस्तार
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चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों के साथ सामरिक संतुलन
4. क्या बदलेगा भारत-चीन का रिश्ता?
हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस यात्रा से भारत-चीन के रिश्तों में पूरी तरह से बदलाव आ जाएगा, लेकिन यह एक बातचीत की शुरुआत जरूर है। यह दौरा राजनयिक संवाद की पुनः शुरुआत के रूप में देखा जा सकता है।
भारत अब एक आत्मनिर्भर और रणनीतिक रूप से सजग राष्ट्र के तौर पर उभरा है। वह किसी भी दबाव के आगे झुकता नहीं है, और ऐसे में यह यात्रा चीन को एक स्पष्ट संदेश भी देती है कि भारत अब अपनी शर्तों पर संवाद करता है।
PM मोदी की यह चीन यात्रा सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय समिट में भाग लेने भर की नहीं है, बल्कि यह भारत की विदेश नीति का नया अध्याय लिखने जैसा है। यह यात्रा यह दिखाएगी कि भारत अब वैश्विक मंचों पर न केवल बराबरी से खड़ा है, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन बनाने में भी केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस यात्रा से भारत-चीन के संबंधों में कोई सकारात्मक मोड़ आता है या दोनों देश सिर्फ औपचारिकताओं तक सीमित रहेंगे।
भारत और चीन के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण चल रहे रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, 2019 के बाद पहली बार चीन की यात्रा पर जाएंगे, और यह यात्रा इसलिए खास है क्योंकि यह गलवान झड़प (2020) के बाद उनकी पहली चीन यात्रा होगी। वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट 2025 में भाग लेने के लिए चीन पहुंचेंगे, जहां उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात भी संभावित है।
गलवान झड़प के बाद भारत और चीन के बीच कई मुद्दों पर गतिरोध रहा। दोनों देशों ने सैन्य और राजनयिक स्तर पर वार्ताएं कीं, लेकिन विश्वास की बहाली अब भी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच डिप्लोमैटिक रिलेशन रीसेट का संकेत मानी जा रही है।
2019 के बाद यह उनकी पहली आधिकारिक चीन यात्रा होगी और SCO समिट के मंच पर वे न सिर्फ भारत की आवाज़ उठाएंगे, बल्कि चीन के साथ संबंधों में संतुलन बनाने की भी कोशिश करेंगे।
गलवान के बाद PM मोदी की पहली चीन यात्रा: SCO समिट में दिखेगा नया कूटनीतिक समीकरण
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