विज्ञापन के लिए संपर्क करें

चीन की सैन्य परेड: ट्रंप की बढ़ी टेंशन, DF-41 और DF-17 मिसाइलों से दुनिया को दिखाई ताकत

चीन की सैन्य परेड: ट्रंप की बढ़ी टेंशन

चीन की सैन्य परेड: ट्रंप की बढ़ी टेंशन, DF-41 और DF-17 मिसाइलों से दुनिया को दिखाई ताकत

बीजिंग में हाल ही में हुई चीन की भव्य सैन्य परेड ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। ड्रैगन ने इस परेड में अपने सबसे घातक और आधुनिक हथियारों का प्रदर्शन किया। इनमें खास चर्चा में रहीं DF-41 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) और DF-17 हाइपरसोनिक मिसाइल, जो अमेरिका तक पहुंचकर हमला करने की क्षमता रखती हैं। इस ताकत के प्रदर्शन ने न केवल एशिया बल्कि वॉशिंगटन तक में हलचल मचा दी है।


परेड में क्या दिखाया चीन ने?

बीजिंग के तियानआनमेन स्क्वायर पर आयोजित इस सैन्य परेड में हजारों सैनिकों की टुकड़ियां और सैकड़ों सैन्य वाहन शामिल थे। आधुनिक टैंकों, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम्स के साथ चीन ने अपने रॉकेट फोर्स की क्षमताओं को भी खुलकर प्रदर्शित किया।

  • DF-41 मिसाइल: यह चीन की सबसे उन्नत ICBM है, जो परमाणु हथियार ले जाने और अमेरिका तक वार करने में सक्षम है। इसकी रेंज 12,000-15,000 किलोमीटर बताई जाती है।

  • DF-17 हाइपरसोनिक मिसाइल: यह इतनी तेज़ है कि मौजूदा अमेरिकी डिफेंस सिस्टम भी इसे रोकने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं।


अमेरिका क्यों चिंतित है?

चीन की इस परेड ने साफ संकेत दिया है कि वह अब सिर्फ एशियाई शक्ति नहीं बल्कि वैश्विक सैन्य ताकत बनना चाहता है। अमेरिका और चीन के बीच पहले से ही ट्रेड वॉर और ताइवान विवाद को लेकर तनाव है। ऐसे में इस तरह का सैन्य प्रदर्शन वॉशिंगटन की नींद उड़ाने वाला है।

ट्रंप प्रशासन को यह संदेश साफ तौर पर मिला है कि बीजिंग अपनी सैन्य क्षमताओं को छुपाने के बजाय खुलकर दुनिया को दिखाना चाहता है।


भारत के लिए क्या मायने?

भारत और चीन के बीच लंबे समय से सीमा विवाद है। लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे इलाकों में तनाव पहले ही कई बार देखने को मिला है। चीन के इस सैन्य प्रदर्शन से भारत के रणनीतिक हलकों में भी चिंता बढ़ गई है। हालांकि भारत अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ क्वाड जैसे मंचों पर चीन की रणनीति का मुकाबला करने की कोशिश कर रहा है।


परेड का राजनीतिक संदेश

सिर्फ हथियारों का प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि इस परेड का मकसद घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर संदेश देना था।

  • घरेलू स्तर पर: चीन अपने नागरिकों को यह भरोसा दिलाना चाहता है कि वह पूरी तरह सुरक्षित है और उसकी सेना किसी भी चुनौती का सामना कर सकती है।

  • वैश्विक स्तर पर: यह संकेत देना कि चीन अब अमेरिका को चुनौती देने के लिए तैयार है और उसकी सैन्य तकनीक किसी से पीछे नहीं।


अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

परेड के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता पर चिंता जताई। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में हथियारों की होड़ तेज़ हो सकती है।

रूस ने हालांकि चीन की तारीफ की और कहा कि यह एशियाई देशों की ताकत बढ़ने का संकेत है। वहीं, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने इस परेड को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया।


सैन्य तकनीक में चीन की छलांग

चीन पिछले एक दशक से लगातार अपनी सेना के आधुनिकीकरण पर अरबों डॉलर खर्च कर रहा है। उसका लक्ष्य 2049 तक “विश्व की सबसे ताकतवर सेना” बनाना है। ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर युद्ध क्षमता में भी चीन ने तेजी से प्रगति की है।

बीजिंग की यह सैन्य परेड सिर्फ एक शो नहीं बल्कि ताकत का ऐलान थी। DF-41 और DF-17 जैसी मिसाइलों का प्रदर्शन अमेरिका और उसके सहयोगियों को सीधा संदेश है कि चीन अब वैश्विक शक्ति संतुलन बदलने की स्थिति में पहुंच चुका है।

आने वाले समय में एशिया और दुनिया की राजनीति पर इस सैन्य ताकत का असर गहरा होगा। भारत सहित कई देशों को अपनी सुरक्षा रणनीति नए सिरे से तैयार करनी होगी।

 


Sunita Williams ने धरती पर रखा कदम, जानिए उनके इस 9 महीने की अद्वितीय साहस की कहानीजस्टिन ट्रूडो का इस्तीफा: नए राष्ट्रपति बने मार्क कार्नीक्या रोहित शर्मा का ये आख़िरी वनडे हैं ? सूत्रों के हवाले से ये बड़ी खबर आ रही हैं Mohammad Shami के एनर्जी ड्रिंक पर बवाल, मौलवी बोले- वो गुनाहगार…अपराधी

theguardian.com thetimes.co.uk theaustralian.com.au

newsviewss
Author: newsviewss

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

टॉप हेडलाइंस