ब्राह्मण लड़की के 16 तो OBC लड़की के 12 लाख, छांगुर बाबा की धर्मांतरण की रेट लिस्ट उड़ा देगी होश
मुंबई की भीड़ भरी गलियों से लेकर हाजी अली दरगाह की रौनक तक, आपने कई तरह के लोग देखे होंगे. इन्हीं में से एक था जलालुद्दीन, जिसे लोग प्यार से छांगुर बाबा भी कहते थे. उसकी दुनिया दरगाह के बाहर अंगूठियां बेचने तक सीमित थी, लेकिन आज वही नाम देश भर में एक सनसनीखेज धर्मांतरण रैकेट का मास्टरमाइंड बनकर सुर्खियां बटोर रहा है. उसकी कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है – एक मामूली अंगूठी बेचने वाला कैसे रातों-रात करोड़ों का आसामी बन गया और कैसे उसके काले कारनामों ने ईडी (ED) को भी हैरान कर दिया है.
जब पहली बार छांगुर बाबा की ‘रेट लिस्ट’ की खबर सामने आई तो किसी को यकीन नहीं हुआ. एक हिंदू लड़की को धर्म बदलवाने के बदले लाखों रुपए! लेकिन जो बात सबसे ज्यादा चौंकाने वाली थी, वो थी इस “व्यापार” में जाति का एंगल. खबरों के अनुसार, ब्राह्मण लड़की को धर्मांतरण के लिए 16 लाख रुपए मिलते थे, जबकि ओबीसी लड़की के लिए यह रकम 12 लाख रुपए थी. यह सिर्फ धर्मांतरण नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश लगती है, जिसमें कुछ खास समुदायों को निशाना बनाया जा रहा था. सवाल ये उठता है कि आखिर ये खेल शुरू कहां से हुआ?
हाजी अली के साये में पनपी साजिश
जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा मुंबई के हाजी अली दरगाह के बाहर एक छोटी सी दुकान लगाकर अंगूठियां बेचा करता था. लोगों को लगता था कि वो एक साधारण, मेहनती इंसान है. लेकिन पर्दे के पीछे उसकी एक और दुनिया चल रही थी. धीरे-धीरे उसने गरीब और कमजोर परिवारों की लड़कियों को बहलाना-फुसलाना शुरू किया. शुरुआत में नौकरी, शादी या आर्थिक मदद का लालच दिया जाता था. जब लड़की उसके जाल में फंस जाती थी, तो उसे धर्म बदलने के लिए मजबूर किया जाता था. इस काम में उसकी मदद एक बड़ा नेटवर्क करता था, जिसमें कई बिचौलिए और एजेंट शामिल थे.


ये नेटवर्क बहुत ही संगठित तरीके से काम करता था. हर एजेंट को अपना टारगेट और उस पर लगने वाली कीमत पता होती थी. खबरों के मुताबिक, यह सिर्फ धर्मांतरण तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा लव जिहाद (Love Jihad) एंगल भी था. हिंदू लड़कियों को खास तौर पर निशाना बनाया जाता था, ताकि एक तीर से कई शिकार किए जा सकें – धर्मांतरण, सामाजिक तनाव और आर्थिक लाभ.
ईडी की एंट्री, गुत्थी सुलझाने की चुनौती
छांगुर बाबा का असली राज तब खुला, जब इस पूरे मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) के हाथ लगी. ईडी ने जब छांगुर बाबा की संपत्ति और उसके बैंक खातों की जांच शुरू की, तो उनके होश उड़ गए. एक मामूली अंगूठी बेचने वाले के खाते में करोड़ों रुपए थे. ये पैसा कहां से आया? इसका सीधा जवाब था – धर्मांतरण का धंधा. ईडी अब इस बात की तह तक जा रही है कि इस पैसे का असली स्रोत क्या है. क्या इसे हवाला के जरिए विदेश से भेजा जाता था? क्या इसके पीछे कोई अंतर्राष्ट्रीय साजिश है?
ये गुत्थी इतनी सीधी नहीं है. ईडी की जांच में कई और चौंकाने वाले नाम और नेटवर्क सामने आ सकते हैं. यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि एक गहरी साजिश का हिस्सा है जो भारत के सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने की कोशिश कर रही है.
आखिर कैसे पता चला रेट लिस्ट का?
सवाल ये भी है कि इस ‘रेट लिस्ट’ की खबर लीक कैसे हुई? माना जा रहा है कि इस रैकेट से जुड़े कुछ लोगों की आपसी कलह या फिर पुलिस जांच के दौरान ही ये बात सामने आई होगी. जिस तरह से जाति के आधार पर पैसे तय किए गए थे, उससे साफ है कि यह सिर्फ एक रैकेट नहीं, बल्कि एक विचारधारा का हिस्सा था, जिसका मकसद समाज को बांटना और अस्थिर करना था.
यह कहानी हमें सिर्फ एक अपराधी के बारे में नहीं बताती, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे हमारे समाज में छिपे हुए खतरे काम करते हैं. छांगुर बाबा जैसे लोग हमारे बीच ही रहते हैं, साधारण बनकर, और मौका पाते ही अपने मंसूबों को अंजाम देते हैं.
यह मामला अब जांच के दायरे में है, और उम्मीद है कि जल्द ही इसके पीछे के सभी चेहरों का खुलासा होगा. लेकिन तब तक, यह कहानी एक चेतावनी है कि हमें अपने समाज और परिवार के प्रति और भी जागरूक रहने की जरूरत है.
छांगुर बाबा की धर्मांतरण की रेट लिस्ट उड़ा देगी होश, ब्राह्मण लड़की के 16 तो OBC लड़की के 12 लाख












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