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‘ट्रंप ने सब कुछ गंवा दिया, जब तक वो राष्ट्रपति रहेंगे…’, भारत पर 50% टैरिफ की दुनियाभर में चर्चा, वर्ल्ड मीडिया ने क्या-क्या लिखा?

'ट्रंप ने सब कुछ गंवा दिया, जब तक वो राष्ट्रपति रहेंगे

‘ट्रंप ने सब कुछ गंवा दिया, जब तक वो राष्ट्रपति रहेंगे…’, भारत पर 50% टैरिफ की दुनियाभर में चर्चा, वर्ल्ड मीडिया ने क्या-क्या लिखा?

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह है भारत पर लगाया गया 50% टैरिफ। यह कदम न सिर्फ दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा रहा है, बल्कि दुनियाभर के मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच बहस का विषय बन गया है। ट्रंप का यह फैसला अंतरराष्ट्रीय व्यापार समीकरणों को हिला सकता है।

ट्रंप का विवादित फैसला

ट्रंप ने दावा किया कि भारत अमेरिकी सामान पर लंबे समय से अधिक टैरिफ लगाता रहा है, और अब अमेरिका को बराबरी करनी होगी। इसी तर्क के आधार पर उन्होंने भारत से आने वाले कई प्रोडक्ट्स पर 50% इम्पोर्ट टैरिफ घोषित कर दिया।

यह कदम सीधे तौर पर भारत की अर्थव्यवस्था, खासकर आईटी, स्टील, ऑटो और फार्मा सेक्टर को प्रभावित करेगा। वहीं अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं पर भी इसका असर पड़ना तय है।

CNN का रिएक्शन

अमेरिकी न्यूज़ चैनल CNN ने इसे “ट्रंप का आक्रामक दांव” करार दिया। चैनल के मुताबिक, यह कदम चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, क्योंकि ट्रंप हमेशा से “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडे को अपनी ताकत मानते रहे हैं।

CNN ने लिखा,
“ट्रंप ने सब कुछ गंवा दिया है, और जब तक वो राष्ट्रपति रहेंगे, अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी वैश्विक स्तर पर अस्थिर बनी रहेगी।”

द गार्जियन (The Guardian) की रिपोर्ट

ब्रिटिश अख़बार द गार्जियन ने लिखा कि भारत पर इतना बड़ा टैरिफ लगाना सिर्फ आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि एक तरह से भूराजनैतिक दबाव है। गार्जियन ने चेतावनी दी कि यह कदम भारत-अमेरिका रिश्तों को दशकों पीछे ले जा सकता है।

उनके अनुसार,
“भारत दुनिया की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था है। अमेरिका को सहयोगी की ज़रूरत है, दुश्मन की नहीं।”

भारतीय मीडिया की प्रतिक्रिया

भारत में इस मुद्दे को लेकर दो तरह के सुर देखने को मिले। कुछ विशेषज्ञों ने कहा कि भारत को अब आत्मनिर्भरता (Aatmanirbhar Bharat) की दिशा में और तेजी से कदम उठाने होंगे। वहीं विपक्षी नेताओं ने इसे मोदी सरकार की विदेश नीति की “कमजोरी” बताकर घेरा।

सोशल मीडिया पर भी #TrumpTariff और #IndiaUS ट्रेंड करने लगा। हजारों यूजर्स ने इसे अमेरिका की “आर्थिक बदले की राजनीति” बताया।

असर भारत-अमेरिका रिश्तों पर

भारत और अमेरिका पिछले दो दशकों से रणनीतिक साझेदारी को गहराई देने की कोशिश कर रहे हैं। रक्षा, टेक्नोलॉजी और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच बड़े समझौते हुए हैं। लेकिन ट्रंप के इस टैरिफ कदम से यह साझेदारी झटका खा सकती है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत अब यूरोपीय यूनियन और एशियाई देशों के साथ व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में और तेजी से बढ़ेगा।

ट्रंप का पॉलिटिकल एजेंडा

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ट्रंप ऐसे बयान और फैसले देकर अपनी “हार्डलाइनर” छवि बनाए रखना चाहते हैं। चुनावी साल में वो बार-बार चीन, भारत और मैक्सिको जैसे देशों को निशाने पर लेते हैं ताकि अमेरिकी मतदाताओं को दिखा सकें कि वो अमेरिकी हितों की रक्षा कर रहे हैं।

भविष्य की राह

अब सबसे बड़ा सवाल है—भारत इसका जवाब कैसे देगा?

  • क्या भारत भी अमेरिकी सामान पर टैरिफ बढ़ाएगा?

  • या फिर बातचीत के जरिए इस विवाद को सुलझाने की कोशिश होगी?

  • क्या यह तनाव आने वाले समय में और बड़े आर्थिक टकराव में बदल सकता है?

ट्रंप का यह कदम सिर्फ एक टैरिफ बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भारत की छवि और अमेरिकी रिश्तों के लिए चुनौती है। वर्ल्ड मीडिया ने इसे बड़े झटके के रूप में देखा है। चाहे CNN इसे अस्थिरता की निशानी बता रहा हो या गार्जियन इसे रणनीतिक गलती मान रहा हो, इतना साफ है कि यह विवाद अभी लंबा चलने वाला है।

भारत के लिए अब ज़रूरी है कि वह अपने आर्थिक और कूटनीतिक कार्ड सोच-समझकर खेले।

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Author: newsviewss

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