तुर्किए का ALKA-KALPAN: ऐसा लेज़र हथियार जो हवा में ही दुश्मन ड्रोन को कर देगा खाक – भारत को भी सताने लगी चिंता?
दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताकतें — अमेरिका, चीन और रूस — अब तक ऐसा हथियार बनाने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाईं, जो हवा में उड़ते दुश्मन के ड्रोन को चुटकियों में खत्म कर दे। लेकिन अब पाकिस्तान के करीबी दोस्त तुर्किए (पूर्व में तुर्की) ने एक ऐसा घातक लेज़र हथियार बना लिया है, जिसने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को भी अलर्ट मोड में डाल दिया है।
इस हाई-टेक हथियार का नाम है – ALKA-KALPAN। यह सिर्फ ड्रोन ही नहीं, बल्कि सड़क किनारे लगाए गए IED (इम्प्रोवाइज़्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेज़) और अन्य हवाई खतरों से सैनिकों को बचाने में भी सक्षम है।
💥 ALKA-KALPAN क्या है?
ALKA-KALPAN एक डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (Directed Energy Weapon – DEW) है। यह लेज़र किरणों के माध्यम से टारगेट को पहचानता है, ट्रैक करता है और फिर इतनी तेज़ ऊर्जा छोड़ता है कि उड़ता हुआ ड्रोन हवा में ही जलकर राख हो जाता है।
यह सिस्टम स्टेट-ऑफ-द-आर्ट टेक्नोलॉजी से लैस है और इसे किसी भी बख्तरबंद वाहन, टैंक, या सैनिक वाहनों पर फिट किया जा सकता है।


🛰️ कैसे काम करता है ALKA-KALPAN?
इस हथियार की सबसे खास बात है इसकी क्विक रिस्पॉन्स क्षमता। जैसे ही कोई ड्रोन या विस्फोटक डिवाइस सिस्टम की रेंज में आती है, ये:
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पहले उसे रडार और सेंसर से पहचानता है।
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फिर AI बेस्ड सिस्टम से खतरे का आकलन करता है।
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और आख़िर में लेज़र बीम से उसे टारगेट करके पलभर में खत्म कर देता है।
इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की मिसाइल या गोला-बारूद की जरूरत नहीं होती, जिससे यह सिस्टम लॉन्ग टर्म में काफी किफायती भी है।
🧨 सिर्फ ड्रोन नहीं, IED से भी निपटेगा
तुर्की के रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ALKA-KALPAN सिर्फ एरियल थ्रेट (हवाई खतरे) को ही नहीं बल्कि ज़मीन पर लगाए गए बमों को भी सक्रिय होने से पहले निष्क्रिय कर सकता है।
इसका मतलब है कि यह हथियार आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाले रिमोट-एक्टिवेटेड बमों, रोडसाइड IEDs और यहां तक कि कमर्शियल ड्रोन से फेंके जाने वाले ग्रेनेड को भी डिटेक्ट कर सकता है।
🇵🇰 पाकिस्तान की तरफ से संभावित इस्तेमाल?
तुर्किए और पाकिस्तान के सैन्य रिश्ते बेहद मजबूत हैं। तुर्किए पहले ही पाकिस्तान को युद्धपोत, ड्रोन, रडार सिस्टम और ट्रेनिंग सपोर्ट दे चुका है। ऐसे में अगर यह लेज़र हथियार पाकिस्तान को निर्यात किया जाता है, तो भारत के लिए यह सीमा पर एक नई चुनौती बन सकता है।
विशेषकर पंजाब और जम्मू-कश्मीर सेक्टर में, जहां पाकिस्तान अक्सर ड्रोन के जरिए हथियार, ड्रग्स या विस्फोटक भेजने की कोशिश करता है, वहां इस तकनीक से उसे बड़ा फायदा हो सकता है।
🇮🇳 भारत की तैयारी क्या है?
भारत भी डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW) टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है। DRDO (Defence Research and Development Organisation) ने ‘ADITYA’ और ‘DEW-02’ जैसे प्रोजेक्ट्स लॉन्च किए हैं, लेकिन अभी ये परीक्षण के स्तर पर हैं।
अगर तुर्किए का ALKA-KALPAN पाकिस्तान की सेना के पास पहुंचता है, तो भारत को अपने एंटी-ड्रोन डिफेंस सिस्टम को और मजबूत करना पड़ेगा।
🌍 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल
ALKA-KALPAN की लॉन्चिंग के बाद अमेरिका, इज़राइल और यूरोपीय यूनियन के रक्षा विश्लेषक भी इस पर नजर बनाए हुए हैं। क्योंकि अब तक लेज़र टेक्नोलॉजी को मुख्य युद्ध प्रणाली के रूप में नहीं अपनाया गया था, लेकिन तुर्किए ने इसे सिर्फ रिसर्च से निकलकर जमीन पर लाने का साहसिक कदम उठाया है।
⚠️ यह तकनीक भारत के लिए क्यों है चिंता का विषय?
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तुर्किए का पाकिस्तान प्रेम, तकनीक ट्रांसफर को आसान बनाता है।
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ड्रोन हमले अब ज्यादा सटीक और तेजी से हो सकते हैं।
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एलओसी और पंजाब सीमा पर ड्रोन ट्रैफिक का खतरा बढ़ सकता है।
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भारत की DEW प्रगति को तेज़ी से आगे बढ़ाना अब ज़रूरी है।
ALKA-KALPAN सिर्फ एक हथियार नहीं, बल्कि एक टेक्नोलॉजिकल बेंचमार्क है, जिसने दिखा दिया कि अब युद्ध सिर्फ मिसाइल और टैंकों से नहीं, बल्कि लेज़र और AI से भी लड़े जाएंगे।
अगर भारत को इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत रखनी है, तो अब सिर्फ रिएक्शन नहीं, बल्कि प्रोएक्टिव टेक्नोलॉजी डेवेलपमेंट ही एकमात्र रास्ता है।












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