“देवकीनंदन ठाकुर को जान से मारने की धमकी: क्या भक्ति की आवाज़ डर से दबाई जा सकती है?”
भारत में जहां एक ओर आध्यात्म और संतों की वाणी को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर जब कोई आध्यात्मिक संत को धमकी मिलती है, तो यह पूरे समाज के लिए एक जागने वाली घंटी बन जाती है। कुछ ऐसा ही हुआ है हमारे आदरणीय कथावाचक श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के साथ।
वेदों और पुराणों की अमृत वाणी को जन-जन तक पहुंचाने वाले ठाकुर जी को जान से मारने की धमकी मिली है। यह खबर केवल एक संत के प्रति घृणा नहीं, बल्कि समाज की उस आत्मा पर हमला है, जो शांति और श्रद्धा की नींव पर टिकी है।
🔍 क्या है मामला?
मथुरा में स्थित ठाकुर जी के मंदिर एवं आश्रम में उनके भाई विजय शर्मा, जो मंदिर के सचिव भी हैं, ने बताया कि एक अनजान व्यक्ति ने उन्हें कॉल कर धमकी दी कि “देवकीनंदन ठाकुर ज्यादा होशियारी दिखा रहे हैं, अब अंजाम भुगतने को तैयार रहें।”
यह बात उन्होंने स्थानीय पुलिस थाने में रिपोर्ट की, और पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
🙏 कौन हैं देवकीनंदन ठाकुर?
-
श्री देवकीनंदन ठाकुर भारत के प्रख्यात भागवताचार्य हैं।
-
उन्होंने देश और विदेश में हजारों कथाओं के माध्यम से धर्म का प्रचार किया है।
-
वे केवल कथा वाचक नहीं, बल्कि एक सामाजिक चिंतक भी हैं जो धार्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखते हैं।
🚨 धमकी का मतलब क्या?
धमकी देना कोई नई बात नहीं, लेकिन जब यह एक आध्यात्मिक संत को दी जाए, जो समाज को जोड़ने का काम करता है, तो सवाल उठता है कि आख़िर डर किसे है उनके शब्दों से?
-
क्या यह धमकी उनके सामाजिक मुद्दों पर बोलने की वजह से है?
-
या फिर कुछ ताकतों को सच्चाई की आवाज़ से डर लग रहा है?
🛡️ पुलिस की भूमिका
मथुरा पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और कॉल की लोकेशन ट्रेस करने का काम शुरू कर दिया है।
एटीएस (Anti-Terror Squad) और साइबर टीम को भी इस केस में लगाया गया है ताकि जल्द से जल्द धमकी देने वाले शख्स की पहचान हो सके।
🧘 समाज की प्रतिक्रिया
धार्मिक संगठनों, श्रद्धालुओं और ठाकुर जी के शिष्यों ने इस घटना पर गहरा रोष जताया है। सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं:
“धर्म की रक्षा करने वालों को अगर डराया जाएगा, तो हम सब मिलकर आवाज़ उठाएंगे।”
📢 क्या कहते हैं संत?
देवकीनंदन ठाकुर जी ने अभी तक इस मामले में शांति और संयम बनाए रखा है। उनके प्रवचनों की तरह उनका व्यवहार भी गंभीर और मर्यादित है। वे जानते हैं कि धर्म का मार्ग कभी आसान नहीं होता, लेकिन डर से झुकना भी संत का मार्ग नहीं।
🧭 आगे का रास्ता क्या है?
-
सरकार को चाहिए कि ऐसे संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करें ताकि कोई असामाजिक तत्व उन्हें निशाना न बना सके।
-
धार्मिक नेताओं को डराने की साजिशें अगर अब नहीं रोकी गईं, तो यह हमारे सांस्कृतिक ढांचे पर चोट होगी।
-
समाज को भी चाहिए कि धार्मिक नेताओं के साथ खड़ा हो, जब उन्हें गलत तरीके से दबाने की कोशिश की जाए।
धर्म, आस्था और शांति की बात करने वाले संतों को धमकाना केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं है, यह हिंदू संस्कृति, समाज और राष्ट्र की आत्मा पर हमला है।
श्री देवकीनंदन ठाकुर जैसे संत सिर्फ धर्म नहीं सिखाते, वे हमें मानवता की भाषा भी सिखाते हैं। ऐसे में हर भारतवासी को चाहिए कि वे इस तरह की धमकियों के खिलाफ एकजुट हों।देवकीनंदन ठाकुर जी ने अभी तक इस मामले में शांति और संयम बनाए रखा है। उनके प्रवचनों की तरह उनका व्यवहार भी गंभीर और मर्यादित है। वे जानते हैं कि धर्म का मार्ग कभी आसान नहीं होता, लेकिन डर से झुकना भी संत का मार्ग नहीं।













Users Today : 1
Views Today : 1