बूंद-बूंद पानी को तरस रहा पाकिस्तान, चीन ने मिलकर बनाया प्लान – ड्रैगन लेगा भारत से पंगा?
इस्लामाबाद/नई दिल्ली
पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान इस समय पानी की जबरदस्त किल्लत से जूझ रहा है। जहां एक तरफ देश के बड़े हिस्सों में सूखा पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत से मिलने वाले पानी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इस पूरी स्थिति ने न सिर्फ पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि अब इसमें चीन के शामिल होने से मामला और गंभीर होता नजर आ रहा है।
💧 सिंधु जल संधि और भारत-पाक संबंध
1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता से सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) पर हस्ताक्षर हुए थे। इसके तहत भारत को तीन पूर्वी नदियों—रावी, ब्यास और सतलज—का पानी उपयोग करने का अधिकार मिला, जबकि पाकिस्तान को झेलम, चिनाब और सिंधु नदियों का नियंत्रण सौंपा गया।
भारत अब इस संधि की समीक्षा करने पर विचार कर रहा है। इसका सीधा असर पाकिस्तान की जल आपूर्ति पर पड़ सकता है, क्योंकि उसकी कृषि और पीने के पानी का बड़ा हिस्सा इन्हीं नदियों पर निर्भर है।
🏜️ पाकिस्तान में पानी की किल्लत चरम पर
वर्तमान में पाकिस्तान की हालत ये है कि वहां के कई प्रांत—खासकर बलूचिस्तान, सिंध और पंजाब में ग्राउंड वॉटर लेवल खतरनाक स्तर तक नीचे चला गया है। कई इलाके ऐसे हैं जहां टैंकरों से पानी की आपूर्ति करनी पड़ रही है।
पानी की बर्बादी, सरकारी नीतियों की कमी और बदलते मौसम की मार ने इस स्थिति को और बदतर बना दिया है। और अब जब भारत से आने वाले पानी पर भी खतरा है, पाकिस्तान की सरकार और जनता में हड़कंप मच गया है।
🐉 चीन की एंट्री: क्या ये भारत के खिलाफ नई चाल है?
हाल के दिनों में चीन और पाकिस्तान के बीच जल प्रबंधन को लेकर कई बैठकें हुई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन पाकिस्तान की मदद से सिंधु बेसिन में डैम और जलमार्ग प्रोजेक्ट्स बनाने की योजना बना रहा है।
यह भारत के लिए एक चिंता का विषय है क्योंकि इससे स्ट्रैटेजिक बैलेंस बिगड़ सकता है। चीन पहले से ही ब्रह्मपुत्र नदी पर डैम बना रहा है और अब सिंधु पर उसका दखल भारत के जल संसाधनों को भी प्रभावित कर सकता है।
🔍 भारत की स्थिति और नजरिया
भारत लंबे समय से इस संधि का पालन करता आया है। लेकिन पुलवामा हमले के बाद भारत सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया था कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।”
भारत अब जल संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए नई योजनाएं और डैम निर्माण की तरफ बढ़ रहा है, ताकि वह अपने हिस्से का पानी संधि के तहत पूरी तरह इस्तेमाल कर सके।
🌐 अंतरराष्ट्रीय नजरिया
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत सिंधु जल संधि को स्थगित करता है, तो यह एक बड़ा डिप्लोमैटिक स्टेप होगा। हालांकि, यह कदम तभी उठाया जाएगा जब पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को समर्थन देने की नीति में कोई बदलाव न हो।
विश्व बैंक, जो इस संधि का गारंटर है, वह भी फिलहाल मामले को गंभीरता से देख रहा है और दोनों देशों को बातचीत से समाधान निकालने की सलाह दे रहा है।
भारत और पाकिस्तान के बीच पानी को लेकर तनाव कोई नई बात नहीं है, लेकिन मौजूदा हालात ने इस मुद्दे को नई ऊंचाई दे दी है। पाकिस्तान की जल संकट की स्थिति और चीन का हस्तक्षेप आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में भू-राजनीतिक समीकरणों को बदल सकते हैं।
भारत को अब अधिक सतर्कता से आगे बढ़ना होगा, ताकि वह अपने हितों की रक्षा करते हुए क्षेत्रीय शांति बनाए रख सके।
बूंद-बूंद पानी को तरस रहा पाकिस्तान, चीन ने मिलकर बनाया प्लान – ड्रैगन लेगा भारत से पंगा?












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