भारत के विकास को रोकने की कोशिश: ईरान ने ट्रंप प्रशासन के नए प्रतिबंधों पर जताई नाराजगी
दुनिया की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है। इस बार मुद्दा है अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत की कुछ कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंध और उस पर ईरान की तीखी प्रतिक्रिया। ईरानी विदेश मंत्रालय ने इसे भारत की तरक्की रोकने की कोशिश बताया है और साफ कर दिया है कि वह चुप नहीं बैठेगा।
क्या है पूरा मामला?
डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से अपनी ट्रुथ सोशल पोस्ट पर एलान किया कि अमेरिका भारत की कुछ बड़ी इंडियन कंपनियों पर विशेष आर्थिक प्रतिबंध लगाएगा। उनके मुताबिक भारत ने बीते वर्षों में अमेरिका से व्यापार में एकतरफा लाभ लिया है और अब समय आ गया है कि इसे संतुलित किया जाए।
इन प्रतिबंधों का सीधा असर भारत-ईरान संबंधों पर भी पड़ता है, खासकर तेल व्यापार पर। भारत, ईरान से एक प्रमुख कच्चे तेल का आयातक रहा है, और इन प्रतिबंधों से ईरान की अर्थव्यवस्था को भी गहरा झटका लग सकता है।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इन अमेरिकी प्रतिबंधों को ‘दुष्प्रवृत्त कृत्य’ (malevolent act) करार दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा:
“ये प्रतिबंध भारत की आर्थिक तरक्की को बाधित करने का एक सोचा-समझा प्रयास हैं। अमेरिका का असली उद्देश्य भारत और ईरान के मजबूत व्यापारिक संबंधों को कमजोर करना है।”
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका बार-बार अपने हितों के लिए दुनिया के अन्य देशों की संप्रभुता और विकास को कुचलने की कोशिश करता रहा है।
भारत की स्थिति क्या है?
भारत की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन विदेश मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि भारत अपनी रणनीतिक साझेदारियों को स्वतंत्र रूप से तय करता है और किसी भी बाहरी दबाव में झुकने वाला नहीं है।
भारत और ईरान के बीच चाबहार पोर्ट, ऊर्जा सहयोग और फारस की खाड़ी में रणनीतिक संतुलन के क्षेत्र में मजबूत संबंध हैं। भारत के लिए ईरान एक अहम रणनीतिक भागीदार है, और अमेरिका के प्रतिबंधों से दोनों देशों के संबंधों में तनाव आ सकता है।
अमेरिका की भूमिका
ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका पहले भी ईरान के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगा चुका है। अब अगर भारत की कंपनियों को भी इन प्रतिबंधों में घसीटा जाता है, तो यह सिर्फ भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को ही नहीं, बल्कि अमेरिका की वैश्विक छवि को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
आगे क्या?
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भारत को तय करना होगा कि वह अमेरिका के दबाव में आता है या अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को प्राथमिकता देता है।
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ईरान, भारत के साथ मिलकर इस स्थिति से निपटने के लिए कूटनीतिक बातचीत का रास्ता भी अपना सकता है।
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यह मामला आने वाले समय में G20 और BRICS जैसे मंचों पर भी चर्चा का विषय बन सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप के नए प्रतिबंध केवल राजनीतिक एलान नहीं हैं, बल्कि इसके वैश्विक असर होंगे। भारत को इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में अपनी प्राथमिकताओं और साझेदारियों को समझदारी से संभालना होगा। ईरान की प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि ये मुद्दा सिर्फ भारत-अमेरिका का नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति में संतुलन का भी है।
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