“भारत ने दागी मिसाइलें, पाकिस्तान ने मांगी दुआएं: क्या मोरल ग्राउंड पर कमजोर हो रहा है इस्लामाबाद?”
जब कोई देश सुरक्षा से जुड़े संकट से जूझता है, तो अक्सर उसके नेता साहस और रणनीति की भाषा बोलते हैं। लेकिन पाकिस्तान में इस बार कुछ और ही देखने को मिला। देश के आंतरिक मामलों के मंत्री मोहसिन नकवी ने हाल ही में एक इस्लामिक सम्मेलन में जो कहा, उससे न सिर्फ पाकिस्तान की कूटनीतिक सोच उजागर हुई, बल्कि यह भी दिखा कि वह मजबूती की जगह ‘मजहबी जज़्बात’ के सहारे खुद को दिलासा देने में जुटा है।
उन्होंने कहा कि “भारत ने हमारे एयरबेस पर 11 मिसाइलें दागीं, लेकिन अल्लाहताला ने हमें बचा लिया। हमें अब दूसरों के मसले नहीं देखने, अपने मसले नहीं छोड़ने चाहिए।” यह बयान न सिर्फ भावुक था, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पाकिस्तान अब रणनीतिक जवाब के बजाय धार्मिक शरण में सच्चाई ढूंढ़ रहा है।
🔥 भारत का स्पष्ट संदेश: एक्शन का रिएक्शन ज़रूरी है
अगर भारत की तरफ से किसी प्रकार की सैन्य कार्रवाई हुई, तो उसके पीछे स्पष्ट संदेश होता है — आतंकवाद और सीमा उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भारत ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि यदि उसके सैनिकों या नागरिकों पर हमला होगा, तो जवाब ज़रूर मिलेगा।
पाकिस्तान द्वारा यह दावा कि “11 मिसाइलें दागी गईं” और उसके बावजूद “कोई नुकसान नहीं हुआ”, या तो तकनीकी रूप से असंभव है या राजनीतिक बचाव के लिए गढ़ा गया बयान है।
😢 पाकिस्तान का आत्मग्लानि से भरा रुख
मोहसिन नकवी का इस्लामिक स्कॉलर्स के सामने यह भावुक बयान कि “हम मुसलमान अपने मसलों पर ध्यान दें और दूसरों की तरफ न देखें” — यह बात एक तरह से पाकिस्तान की आंतरिक विफलताओं की स्वीकारोक्ति लगती है।
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आर्थिक संकट,
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आईएमएफ की शर्तों पर झुकती सरकार,
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बेलगाम आतंकवाद,
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और अब आतंरिक विद्रोह व बालोचिस्तान की उथल-पुथल,
इन सबके बीच पाकिस्तान की सरकार धार्मिक भावनाओं का सहारा लेकर जनता की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश कर रही है।
🇮🇳 भारत की सैन्य श्रेष्ठता से डर?
भारतीय वायुसेना और मिसाइल सिस्टम अब सिर्फ दक्षिण एशिया में नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी ताकतवर माना जाता है। पाकिस्तान जानता है कि भारत अगर कोई सैन्य कदम उठाए, तो उसकी प्रतिक्रिया इतनी सटीक और व्यापक होगी कि उसे संभालना मुश्किल हो जाएगा।
बालाकोट एयरस्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे ऑपरेशन्स के बाद पाकिस्तान को यह एहसास हो चुका है कि अब भारत की नीतियाँ ‘बोलने’ से नहीं, ‘करने’ से चलती हैं।
📢 मुस्लिम दुनिया को भावनात्मक अपील?
मोहसिन नकवी का यह बयान एक और दिशा में भी इशारा करता है — क्या पाकिस्तान मुस्लिम दुनिया से एक बार फिर सहानुभूति की उम्मीद कर रहा है?
उन्होंने कहा कि मुसलमानों को दूसरों के मामलों में नहीं झांकना चाहिए। यह बात शायद भारत के कश्मीर, इजरायल-गाजा या अन्य इस्लामी मामलों को लेकर पाकिस्तान की दोहरी नीति को उजागर करती है।
पाकिस्तान हमेशा दूसरों के मामलों में टांग अड़ाने का प्रयास करता आया है, लेकिन अब अपने हालात देखकर “अल्लाह की रहमत” और “धार्मिक विचारों” में शरण लेना — यह उसकी नीति में बदलाव नहीं, बल्कि कमजोरी की स्वीकारोक्ति है।
💬 सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया
जैसे ही मोहसिन नकवी का बयान वायरल हुआ, ट्विटर, यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर मीम्स और प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।
कुछ वायरल टिप्पणियाँ:
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“बमों के जवाब में दुआएं – नया सैन्य सिद्धांत?”
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“अब सेना नहीं, सिर्फ नियति पर भरोसा?”
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“मिसाइलें भारत की, भरोसा अल्लाह पर – वाह री रणनीति!”
जब देश के नेता रणनीति की जगह भावनाओं और धर्म पर निर्भर हो जाएं, तो समझ लेना चाहिए कि वो किसी समाधान की तरफ नहीं, एक असहाय अवस्था में जी रहे हैं।
भारत ने हमेशा स्पष्ट रखा है — “अगर हमला होगा, तो जवाब भी मिलेगा।”
अब यह पाकिस्तान पर है कि वह इस जवाब को मजबूती से ले या मोमबत्तियों और दुआओं में खो जाए।












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