मोदी-संविधान को सिर पर रखकर नाचने वालों ने ही उसे कुचला – कांग्रेस पर बड़ा हमला
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीतिक बयान हमेशा चर्चा का विषय रहता है। बीते दिन दिल्ली के रोहिणी में एक भव्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “संविधान को सिर पर रखकर नाचने वालों ने ही संविधान को कुचला था।” पीएम मोदी के ये शब्द सोशल मीडिया पर ही नहीं, पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुके हैं।
क्या था पीएम मोदी का पूरा बयान?
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में साफ़ शब्दों में कहा,
“जिन्होंने सालों-साल संविधान को सिर पर रखकर नाचने का नाटक किया, असल में वही लोग थे जिन्होंने संविधान को सबसे ज़्यादा कुचला। आज ये लोग नए उत्साह और झूठे वादों के साथ फिर से सामने आ रहे हैं. लेकिन देश ने इनके खेल को पहचान लिया है और अब इन्हें जवाब देने के लिए तैयार है।”

इस बयान के ज़रिए पीएम मोदी ने कांग्रेस द्वारा स्वतंत्र भारत में लिए गए फैसलों और संवैधानिक संस्थाओं के साथ की गई कथित राजनीति पर सवाल खड़े किए।
क्यों कहा मोदी ने ‘संविधान कुचला’?
मोदी ने अपने वक्तव्य में इशारों-इशारों में कांग्रेस के आपातकाल (Emergency) काल, न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव जैसे मुद्दों को फिर से याद दिलाया।
उन्होंने कहा कि जब देश की जनता ने संविधान को सर्वोच्च माना, तब उसी समय कुछ लोगों ने अपने हितों के लिए संविधान की अनदेखी की और उसे ताक पर रखा।
विपक्ष पर बढ़ती सियासी तल्ख़ी
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब विपक्षी दल सरकार पर बार-बार लोकतंत्र और संविधान की अनदेखी के आरोप लगाते रहे हैं। मोदी के अनुसार, कांग्रेस ने ‘संविधान की रक्षा’ केवल एक राजनीतिक नारा भर बना लिया, व्यवहार में उसे बार-बार नज़रअंदाज़ किया।
उनका इशारा 1975 के आपातकाल के समय संविधान के सस्पेंशन, प्रेस की आज़ादी पर प्रतिबंध और बड़े पैमाने पर विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी की तरफ़ था।
जनता का क्या है रुख?
मोदी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर #IndianConstitution, #CongressVsBJP और #ModiSpeech हैशटैग्स ट्रेंड करने लगे। कई समर्थकों ने मोदी के बयान का समर्थन किया और कहा कि उन्हें सच्चाई को उजागर करने का साहस दिखाना चाहिए, वहीं विपक्षी दलों और उनके समर्थकों ने इसे चुनावी राजनीति और ध्यान भटकाने वाला बताया।

इतिहास की कसौटी पर नेताओं के कर्म
इस बयान के साथ एक बड़ा सवाल फिर उठता है —
क्या वाकई संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए केवल प्रतीकात्मक प्रदर्शन काफी है या उसकी आत्मा को समझना और जमीनी स्तर पर लागू करना ज़रूरी है?
पीएम मोदी के अनुसार, सिर्फ संविधान की किताब हाथ में लेकर नाचना या उसकी शपथ लेना ही देशहित नहीं, बल्कि उसके अनुसार आचरण करना असली राष्ट्रधर्म है।
प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान ने एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। आज के दौर में, जब संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा का विषय गर्माया हुआ है, यह बयान निश्चित तौर पर न सिर्फ चुनावी राजनीति बल्कि आम नागरिक की सोच को भी प्रभावित करेगा।
आने वाले समय में देखना होगा कि विपक्ष इसपर क्या प्रतिक्रिया देता है और चुनावी समर में इसका कितना असर दिखता है।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीतिक बयान हमेशा चर्चा का विषय रहता है। बीते दिन दिल्ली के रोहिणी में एक भव्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “संविधान को सिर पर रखकर नाचने वालों ने ही संविधान को कुचला था।” पीएम मोदी के ये शब्द सोशल मीडिया पर ही नहीं, पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुके हैं।

“जिन्होंने सालों-साल संविधान को सिर पर रखकर नाचने का नाटक किया, असल में वही लोग थे जिन्होंने संविधान को सबसे ज़्यादा कुचला। आज ये लोग नए उत्साह और झूठे वादों के साथ फिर से सामने आ रहे हैं. लेकिन देश ने इनके खेल को पहचान लिया है और अब इन्हें जवाब देने के लिए तैयार है।”। मोदी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर #IndianConstitution, #CongressVsBJP और #ModiSpeech हैशटैग्स ट्रेंड करने लगे। कई समर्थकों ने मोदी के बयान का समर्थन किया और कहा कि उन्हें सच्चाई को उजागर करने का साहस दिखाना चाहिए, वहीं विपक्षी दलों और उनके समर्थकों ने इसे चुनावी राजनीति और ध्यान भटकाने वाला बताया।
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