लद्दाख हिंसा: केंद्र ने सोनम वांगचुक को बताया जिम्मेदार, ‘Gen-Z आंदोलन को भड़काने’ के आरोप
Ladakh Violence 2025: लद्दाख में पिछले कई दिनों से पूर्ण राज्य की मांग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन अब हिंसक हो चुका है। हालात इतने बिगड़े कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच सीधी झड़प हो गई। केंद्र सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया है। गृह मंत्रालय ने कहा कि वांगचुक ने अरब स्प्रिंग और नेपाल के Gen-Z आंदोलन का जिक्र कर युवाओं को भड़काया, जिससे लेह की सड़कों पर हालात बेकाबू हो गए।
क्या हुआ?
शनिवार को लेह के NDS मेमोरियल ग्राउंड में हजारों की संख्या में छात्र और युवा प्रदर्शनकारी जमा हुए। यह विरोध प्रदर्शन पूर्ण राज्य और 6ठे शेड्यूल की मांग को लेकर था। शुरुआत में यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन धीरे-धीरे भीड़ ने उग्र रूप ले लिया।
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प्रदर्शनकारियों ने बीजेपी के दफ्तर पर पथराव किया।
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हिल काउंसिल दफ्तर में भी तोड़फोड़ हुई।
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इसके बाद गुस्साई भीड़ ने बीजेपी दफ्तर में आग लगा दी।
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, लेकिन हालात काबू में नहीं आए। जब प्रदर्शनकारी और हिंसक हो गए, तो पुलिस को आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी, जिसमें कई लोग घायल हुए और कुछ की मौत हो गई।
क्यों हुआ?
लद्दाख में लंबे समय से पूर्ण राज्य और 6ठे शेड्यूल की मांग चल रही है। स्थानीय लोग मानते हैं कि केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद उनकी पहचान, संसाधन और रोजगार पर संकट मंडरा रहा है।
गृह मंत्रालय का आरोप है कि सोनम वांगचुक ने अपने भाषणों में युवाओं को “क्रांतिकारी आंदोलन” की मिसालें देकर भड़काया।
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अरब स्प्रिंग का जिक्र कर यह संदेश दिया गया कि बड़े बदलाव केवल आक्रामक आंदोलनों से संभव हैं।
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नेपाल Gen-Z प्रोटेस्ट का हवाला देकर युवाओं को सड़क पर उतरने के लिए प्रेरित किया।
कब और कैसे बढ़ा तनाव?
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विरोध की शुरुआत 21 सितंबर 2025 को शांतिपूर्ण रैली से हुई थी।
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अगले ही दिन लेह और आसपास के इलाकों में प्रदर्शन तेज हो गए।
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23 सितंबर 2025 को स्थिति उस वक्त हिंसक हो गई जब भीड़ ने बीजेपी दफ्तर और हिल काउंसिल पर हमला कर दिया।
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पुलिस द्वारा आत्मरक्षा में फायरिंग के बाद मामला और गंभीर हो गया।
गृह मंत्रालय का बयान
गृह मंत्रालय ने साफ कहा है कि यह हिंसा “योजना बद्ध” थी और इसके पीछे वांगचुक और उनके समर्थक हैं। बयान में कहा गया:
“लद्दाख में युवाओं को गुमराह कर लोकतांत्रिक विरोध को हिंसा में बदलने का प्रयास किया गया। अरब स्प्रिंग और नेपाल Gen-Z आंदोलन जैसे उदाहरण देकर क्षेत्र की शांति भंग करने की साजिश रची गई।”
सरकार का कहना है कि शांति बहाल करने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं।
स्थानीय नेताओं और विपक्ष का रुख
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कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस घटना पर केंद्र को घेरा। उनका कहना है कि युवाओं की आवाज को सुनने के बजाय उन पर गोली चलाना लोकतंत्र के खिलाफ है।
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कई स्थानीय संगठनों ने मांग की है कि मारे गए लोगों के परिवारों को मुआवजा दिया जाए और पुलिस फायरिंग की न्यायिक जांच हो।
असर और माहौल
लेह और आसपास के इलाकों में कर्फ्यू जैसे हालात हैं। इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं। सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है ताकि हिंसा फिर से न भड़के।
सोशल मीडिया पर #LadakhViolence और #SonamWangchuk तेजी से ट्रेंड कर रहे हैं। लोग इस घटना को लेकर बंटे हुए हैं—कुछ लोग वांगचुक का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ उन्हें हिंसा का जिम्मेदार मान रहे हैं।
आगे क्या?
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केंद्र सरकार ने साफ किया है कि लद्दाख को लेकर कोई भी फैसला बातचीत के जरिए ही होगा, लेकिन हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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स्थानीय संगठनों का कहना है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और तेज होगा।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना लद्दाख की राजनीति और केंद्र-स्थानीय संबंधों पर गहरा असर डालेगी।
लद्दाख की शांत वादियों में भड़की यह हिंसा आने वाले समय में राष्ट्रीय बहस का बड़ा मुद्दा बनने वाली है। सोनम वांगचुक और केंद्र सरकार आमने-सामने हैं। अब देखना होगा कि इस टकराव का हल संवाद से निकलता है या संघर्ष और गहराता है।
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