200 सालों तक अंग्रेजी हुकूमत के पिंजरे में कैद रहने और कठिन संघर्षों के बाद 15 अगस्त 1947 को हम आजाद हुए। आजादी के लिए हमारे वीरों ने अपनी कुर्नबानियां दी। द न्यूज व्यूज इन्ही कुर्बानियों को याद कर रहा है। आजादी के किस्सों को याद कर रहा है। इसी सीरीज में आज हम लेकर आए हैं आजादी के समय के 5 और किस्से तो चलिये जानते हैं इन किस्सों के बारे में
पंडित नेहरू की मौत के बाद लाल बहादुर शास्त्री ने देश की बागडोर संभाली। निष्पक्ष रूप से देखा जाए तो शास्त्री जी का शासन काल बेहद कठिन रहा। पूंजीपति देश पर हावी होना चाहते थे और दुश्मन देश आक्रमण करने की फिराक में थे। 1965 में अचानक पाकिस्तान ने भारत पर हमला कर दिया शास्त्री जी ने इस युद्ध में राष्ट्र को उत्तम नेतृत्व प्रदान किया। शास्त्री जी का नारा जय जवान जय किसान देशवासियों में एक नई चेतना का संचार कर गया। जिसे देश ने पाकिस्तान को कड़ी शिकस्त दी लेकिन 11 जनवरी 1966 को लाल बहादुर शास्त्री की मौत में फिर देश को झटका दे दिया।

स्वतंत्र होने के बाद भारत खाद्यान्नों और दूसरे कृषि उत्पादों की भारी कमी से जूझ रहा था। इसका मुख्य कारण कृषि को लेकर औपनिवेशिक शासन की कमज़ोर नीतियां थी। साल 1965 में भारत सरकार में एक कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन की सहायता से हरित क्रांति की शुरूआत की। भारत में हरित क्रांति एक बड़ी सफलता के रूप में सामने आई। जिससे पूरी दुनिया में भारत का नाम होने लगा।

भारत का पहला रॉकेट 21नवंबर 1963 को तिरूवनंतपुरम के पास तुम बस से लांच हुआ था और इसके साथ भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत हो गई। आज की तारीख में भारत पेशेवर तौर पर दूसरे देशों के उपग्रहों को भी अपने रोकेट से पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने में वैश्विक खिलाड़ी बन चुका है। अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत के बढ़ते कदम के पीछे डॉक्टर विक्रम साराभाई जैसे महान वैज्ञानिक की उर्जा और सामर्थ्य और शक्ति थी।

1967 में एक बार फिर भारत और चीन के बीच गोलियां चली लेकिन इस बार भारत ने दिखा दिया कि वो 1962 की दौर में नहीं है। दरअसल उस वक्त सिक्किम का विलय भारत में नहीं हुआ था तो ऐसे में चीन को वहां भारतीय सेना की मौजूदगी पर आपत्ति थी। चीनी सैनिकों ने 13 अगस्त 1967 को नाथुला में भारतीय सीमा से सटे इलाके में गड्ढ़े खोदने शुरू कर दिए। भारतीय सैनिकों ने जवाब दिया। दोनों देशों के बीच हिंसक झड़प हुई। भारत के सबसे ज्यादा सैनिकों की शहादत हुई। जबकि चीन के 400 से ज़्यादा सैनिक मारे गए। इसके बाद साल 2020 तक चीन ने भारत के साथ कभी हिंसक झड़प नहीं की।

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन यानी “इसरो” का गठन पहले रॉकेट की लॉन्चिंग को मिली सफलता के बाद 1969 में किया गया। इसरो ने इससे पहले कि इंडियन नेशनल कमिटी फॉर स्पेस रिसर्च का स्थान लिया। जिसे 1962 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और महान वैज्ञानिक विक्रम साराभाई ने स्थापित किया था। अब भारत अंतरिक्ष कार्यक्रम चंद्रमा और मंगल मिशन पर फोकस कर रहा है। चंद्रयान-1 पहला मिशन है जिसमें चांद पर किसी भी रूप में पानी की संभावना का पता लगाया है।

Author: Mukul Dwivedi
I graduated From the University of Allahabad and PG diploma in Mass communication From Government Polytechnic Lucknow. After study worked with Bharat samachar as Trainee Producer. Currently I am working With Ekal Bharat as a Producer.











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