भारतीय संसद का बजट सत्र 22 जुलाई को शुरू होकर 12 अगस्त तक चलेगा. 23 जुलाई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आम बजट पेश करेंगी.केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है.क्योंकि ऐसा माना जा रहा है केंद्र सरकार 23 जुलाई को पेश होने वाले बजट में सरकारी कर्मचारियों के पेंशन से जुड़ा बड़ा ऐलान कर सकती है.
दरअसल ऐसा माना जा रहा है.पुरानी पेंशन स्कीम तो बहाल नहीं होगी लेकिन नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) में शामिल कर्मचारियों को उनकी लास्ट सैलरी का 50% पेंशन के रूप में मिल सकता है.केंद्रीय कर्मचारी पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) को बहाल करने की मांग कर रहे हैं.लेकिन सरकार इसके लिए तैयार नहीं है.लेकिन वह NPS को लेकर उनकी चिंता दूर करना चाहती है.यही वजह है कि सरकार NPS का हिस्सा बनने वाले केंद्रीय कर्मचारियों को उनके आखिरी वेतन का 50 फीसदी पेंशन के तौर पर देने का आश्वासन देना चाहती है.2004 से भर्ती होने वाले कर्मचारियों के लिए NPS लागू की गई है.इसमें 25-30 साल तक निवेश करने वालों के लिए हाई रिटर्न दिया जा रहा है.वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की घोषणा के बाद वित्त सचिव टी वी सोमनाथन की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई थी.हालांकि केंद्र ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) फिर से बहाल करने से इनकार कर दिया है, लेकिन इसमें कुछ राहत देने की संभावना बनाए रखी है.ओपीएस में जीवनभर पेंशन के तौर पर आखिरी सैलरी का आधा हिस्सा मिलता था.साथ ही वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक पेंशन में बढ़ोतरी की जाती थी.इसके उलट NPS एक कंट्रीब्यूशन स्कीम है.इसमें सरकारी कर्मचारी अपने मूल वेतन का 10% योगदान देता है,जबकि केंद्र सरकार की तरफ से 14% योगदान दिया जाता है.उसके बाद उस फंड से उसे रिटायरमेंट के बाद पेंशन मिलती है.नई पेंशन स्कीम इंवेस्टमेंट आधारित है इसमें 10% कर्मचारी तो 14% सरकार मिलकर इंवेस्ट करते है 20-25 साल तक इवेस्ट करने के बाद रिटर्न के आधार पर पेंशन मिलती है.रिटर्न अच्छा तो अच्छी पेंशन और कम तो कम पेंशन.जबकि पुरानी पेंशन स्कीम में गारंटीड आखिरी सैलरी का आधा हिस्सा बतौर पेंशन दिया जाता था.
पुरानी पेंशन स्कीम में वेतन से कोई कटौती नहीं होती, लेकिन नई पेंशन स्कीम में कर्मचारियों की सैलरी से 10 फीसदी कटौती होती है… जिसे बाद में पेंशन के रूप में भुगतान किया जाता है.
पुरानी पेंशन स्कीम में रिटायरमेंट पर आधी रकम मिलती थी.जिसके बाद जीवन भर पेंशन के रूप में आय मिलती थी.
पुरानी पेंशन स्कीम में जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) की भी सुविधा है, जो नई पेंशन स्कीम में नहीं है.
पुरानी पेंशन स्कीम में पेंशन की राशि सरकारी खजाने से दी जाती थी,लेकिन नई पेंशन स्कीम में पेंशन शेयर बाजार पर निर्भर है.इसलिए रिटायरमेंट के बाद कितनी राशि पेंशन के तौर पर मिलेगी इसकी पहले से जानकारी नहीं रहती.
पुरानी पेंशन स्कीम में 6 महीने बाद महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी होती है, जो नई पेंशन स्कीम में उपलब्ध नहीं है.
लेकिन सोमनाथन समिति ने दुनिया भर की पेंशन स्कीम के साथ-साथ आंध्र प्रदेश सरकार की पेंशन पॉलिसी को भी स्टडी किया है.इस समिति ने गारंटीड रिटर्न देने के प्रभाव का भी अध्ययन किया है.हालांकि केंद्र के लिए 40-45% गारंटी देना संभव है.लेकिन राजनीतिक तौर से इन कर्मचारियों की चिंता दूर नहीं होती है.इसकी वजह यह है कि कांग्रेस सत्ता में आने पर ओपीएस बहाल करने की बात कह रही है.जब कांग्रेस जैसी विपक्षी पार्टी आज के सूरत ए हाल में पुरानी पेंशन स्कीम बहाल कर सकती है तो यही वजह है कि सरकार 50% गारंटी देने पर गंभीरता से विचार कर रही है.इसका मतलब है ये है कि कम रिटर्न मिलने पर उस अंतर को सरकार पूरा करेगी और 50 % सैलरी देने का प्रावधान लाएगी.अब एक सालाना अनुमान भी लगाना होगा क्योंकि समिति के कई सदस्यों का मानना है.कि सरकारी पेंशन प्रणाली के उलट केंद्र के पास पेंशन फंड नहीं है.संभावना है कि केंद्र इस बार भी एक कोष बनाएगा जिसमें पैसा अलग से रखा जाएगा.यह फंड उन कंपनियों की तरह होगा जो अपने कर्मचारियों के लिए पेंशन का लाभ देती हैं.वैसे तो अधिकारियों का कहना है कि जो लोग 25-30 वर्षों तक नौकरी में बने रहते हैं, उन्हें ओपीएस के तहत मिलने वाली पेंशन के बराबर लाभ मिल रहा है.कम भुगतान की शिकायतें केवल उन लोगों से आ रही हैं, जो 20 साल से कम निवेश करते हैं.












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