वक्फ बिल संशोधन के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की आज दूसरी बैठक हुई। इस दौरान भाजपा और विपक्षी सांसदों के बीच जोरदार बहस हुई। विपक्षी सांसद थोड़ी देर के लिए बैठक से वॉकआउट भी कर गये। बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल की अध्यक्षता में करीब 8 घंटे तक चली बैठक के दौरान मुंबई के ऑल इंडिया सुन्नी जमीयतुल उलमा, दिल्ली स्थित इंडियन मुस्लिम फॉर सिविल राइट्स (आईएमसीआर), उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड और राजस्थान बोर्ड ऑफ मुस्लिम वक्फ के विचारों को सुना गया। विधेयक पर अपना पक्ष रखने के लिए बैठक में आमंत्रित मुस्लिम संगठनों ने बिल का विरोध किया। जेपीसी की अगली बैठक 5 और 6 सितंबर को होगी।
आज नई दिल्ली में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 संबंधी संयुक्त समिति की बैठक में ऑल इंडिया सुन्नी जमीयतुल उलमा मुंबई, इंडियन मुस्लिम फार सिविल राइट्स (आईएमसीआर), दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड व राजस्थान मुस्लिम वक्फ के हितधारको का मौखिक साक्ष्य सुना गया। pic.twitter.com/NVTxf56MHW
— Jagdambika Pal (@jagdambikapalmp) August 30, 2024
बीजेपी सांसदों पर लगे मनमानी करने के आरोप
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी सांसद जब बिल पर अपनी बात रख रहे थे तो उन्हें विपक्षी सांसदों की तरफ से बार-बार टोका-टाकी का सामना करना पड़ रहा था। बीजेपी सांसदों ने विपक्षी सांसदों पर अनियंत्रित होने और उन्हें सही ढंग से नहीं बोलने देने का आरोप लगाया तो वहीं विपक्षी सांसदों ने यह आरोप लगाया कि बीजेपी सांसद मनमानी कर रहे हैं, लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन नहीं कर रहे हैं और विपक्ष के सांसदों पर व्यक्तिगत टिप्पणी भी कर रहे हैं। बैठक में बीजेपी सांसद दिलीप सैकिया और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह के बीच तीखी बहस भी हुई। बैठक में वक्फ बाई यूजर और कलेक्टर के अधिकारों को लेकर अन्य सांसदों के बीच भी तीखी बहस हुई। बताया जा रहा है कि बैठक में असदुद्दीन ओवैसी और अभिजीत गंगोपाध्याय के बीच भी तीखी बहस हुई। गंगोपाध्याय की व्यक्तिगत टिप्पणी को अपमानजनक बताते हुए औवेसी ने जोरदार विरोध किया।
कलेक्टर के अधिकारों को लेकर भी तीखी बहस
सूत्रों के अनुसार बैठक में ‘वक्फ बाई यूजर ‘और कलेक्टर के अधिकारों को लेकर अन्य सांसदों के बीच भी तीखी बहस हुई। हितधारकों ने चिंता जताते हुए कहा कि जिला कलेक्टरों को वक्फ संपत्तियों का सर्वे करने और निर्णय लेने के लिए अंतिम प्राधिकारी होने समेत कई शक्तियां दी जा रही हैं। इतना ही नहीं, हितधारकों ने प्रस्तावित संशोधन के इरादे पर भी सवाल उठाए। विपक्षी दलों ने भी मुस्लिम संगठनों द्वारा उठाई गई चिंताओं पर अपना समर्थन व्यक्त किया। विपक्षी दलों ने जिलाधिकारियों को दी जा रही शक्तियों पर सवाल उठाए. विपक्षी सांसदों ने कहा कि जिला कलेक्टर विवादों पर कैसे निर्णय ले सकते हैं, क्योंकि इससे हितों का टकराव होगा।
मुस्लिम संगठनों को वक्फ कानूनों में संशोधन मंजूर नहीं
मुस्लिम संगठन की तरफ से जेपीसी की बैठक में बुलाए गए ऑल इंडिया सुन्नी जमीयत-ए-उलेमा ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें वक्फ कानूनों में संशोधन मंजूर नहीं है। उसने कहा कि वक्फ मुसलमानों का मामला है और सरकार को इसमें दखल नहीं देना चाहिए। वहीं, जेपीसी के सामने इंडियन मुस्लिम फॉर सिविल राइट्स संस्था ने भी बिल में संशोधन का विरोध किया। संस्था के अध्यक्ष पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब ने इस बिल को अवैध बताते हुए यह आरोप लगाया कि सरकार मुसलमानों के धार्मिक मामलों में दखलंदाजी कर रही है। वहीं DMK जैसी पार्टियों ने वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने पर कड़ी आपत्ति जताई। AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आज बिल के विरोध में एक और लिखित नोट JPC के अध्यक्ष जगदंबिका पाल को दिया।
8 अगस्त को सदन में पेश किया गया था विधेयक
लोकसभा में वक्फ संसोधन विधेयक को 8 अगस्त को लोकसभा में पेश किया गया था। सदन में बहस के बाद संसद की संयुक्त समिति को भेजा गया था। बिल पेश करते हुए सरकार की ओर से कहा गया था कि प्रस्तावित कानून से मस्जिदों के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं होगा। विपक्ष ने इसे मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए उठाया गया कदम और संविधान पर हमला बताया था। इस महीने की शुरुआत में जेपीसी की पहली बैठक हुई थी। इसमें कई विपक्षी सांसदों ने प्रस्तावित कानून के प्रावधानों पर आपत्ति जताई थी।
Author: Mukul Dwivedi
I graduated From the University of Allahabad and PG diploma in Mass communication From Government Polytechnic Lucknow. After study worked with Bharat samachar as Trainee Producer. Currently I am working With Ekal Bharat as a Producer.











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