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हिमाचल के माता ज्वाला देवी का रहस्यमयी मंदिर, जहां कभी नहीं बुझती लौ

क्या आपने कभी ऐसा मंदिर देखा है जहाँ दीपक की जगह जलती हैं नौ ज्वालाएँ, जो कभी बुझती नहीं? ये कोई साधारण मंदिर नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश का प्राचीन और रहस्यमयी ज्वाला देवी मंदिर है। ऐसा क्या रहस्य है यहाँ की ज्वालाओं का, जिसे बुझाने की कोशिश खुद मुगल बादशाह अकबर ने की, लेकिन नाकाम रहा? आइए, जानते हैं इस शक्तिपीठ के चमत्कार और अद्भुत इतिहास को, जो आपको हैरान कर देगा। 

1. इतिहास – हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के ज्वालामुखी कस्बे में स्थित यह मंदिर, 51 शक्तिपीठों में से एक है। कहते हैं कि माता सती की जीभ इसी स्थान पर गिरी थी, और तभी से यहाँ नौ रहस्यमयी ज्वालाएँ जल रही हैं।

2. नौ ज्वालाओं का महत्व- यहाँ की सबसे बड़ी ज्वाला माता ज्वाला देवी की है, जबकि बाकी आठ ज्वालाएँ माता अन्नपूर्णा, माता चंडी, माता महालक्ष्मी, माता हिंगलाज, माता सरस्वती, माता अंबिका, माता अंजी, और माता विध्यवासिनी की हैं। हर ज्वाला का अपना महत्व और धार्मिक महत्व है।

3. राजा भूमि चंद और महाराजा रणजीत सिंह का योगदान- इस मंदिर का निर्माण राजा भूमि चंद ने करवाया था। बाद में, महाराजा रणजीत सिंह और राजा संसारचंद ने भी इसका पुनर्निर्माण कराया और इसे भव्य स्वरूप दिया। कहते हैं कि महाराजा रणजीत सिंह ने यहाँ आकर अपनी तलवार भेंट की थी।

4. अकबर का चुनौतीपूर्ण प्रयास- मुगल बादशाह अकबर ने इन ज्वालाओं को बुझाने की कोशिश की थी। उसने पानी डलवाया, लेकिन ज्वालाएँ और भी तेज़ी से जल उठीं। हार मानकर अकबर ने सोने की छत्र भेंट की, जो बाद में पीतल की बन गई। इस चमत्कार ने उसकी श्रद्धा बदल दी।

5. गुरु गोरखनाथ और माँ की कहानी-कहा जाता है कि गुरु गोरखनाथ माता की आराधना करते थे। एक बार जब उन्होंने माता से भोजन मांगा, तो माता ने आग जलाकर पानी गर्म किया, लेकिन गोरखनाथ भिक्षा लेने नहीं आए। तब से यह आग जलती आ रही है।

6. मंदिर के चमत्कार और रहस्य-यहाँ का सबसे बड़ा रहस्य यह है कि इन ज्वालाओं का स्रोत आज तक वैज्ञानिक नहीं ढूंढ पाए हैं। न तो कोई गैस का रिसाव है और न ही कोई प्राकृतिक कारण। ये ज्वालाएँ अनादि काल से जलती आ रही हैं और इन्हें बुझाया नहीं जा सकता।

यहाँ आने वाले भक्त कहते हैं कि माता ज्वाला देवी उनकी हर मनोकामना पूरी करती हैं। कोई संतान सुख के लिए आता है, तो कोई रोगमुक्ति के लिए। यह मंदिर आस्था और चमत्कार का केंद्र बन चुका है।
तो अगर आप भी इन रहस्यमयी ज्वालाओं का अनुभव करना चाहते हैं, तो एक बार हिमाचल प्रदेश के ज्वाला देवी मंदिर जरूर आएँ। यहां की दिव्यता और चमत्कार आपको जीवन भर याद रहेंगे।

Mukul Dwivedi
Author: Mukul Dwivedi

I graduated From the University of Allahabad and PG diploma in Mass communication From Government Polytechnic Lucknow. After study worked with Bharat samachar as Trainee Producer. Currently I am working With Ekal Bharat as a Producer.

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