उत्तर प्रदेश में मॉक ड्रिल अलर्ट: 19 जिलों में सुरक्षा अभ्यास, तीन कैटेगरी में बांटा गया नेटवर्क
उत्तर प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) प्रशांत कुमार ने बताया कि केंद्र सरकार के निर्देशानुसार प्रदेश को “अलर्ट मोड” पर रखा गया है। इसके तहत प्रदेश के 19 जिलों में मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था की जांच और आपातकालीन स्थिति में प्रतिक्रिया क्षमता को परखा जाएगा।

मॉक ड्रिल का उद्देश्य
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य है संभावित आतंकी हमलों, आपात स्थितियों या किसी भी बड़े खतरे की स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों का आकलन करना। यह अभ्यास इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि पुलिस, प्रशासन और अन्य आपदा प्रबंधन एजेंसियां कितनी तत्परता और समन्वय के साथ कार्य कर सकती हैं।
जिलों का वर्गीकरण: A, B और C कैटेगरी
राज्य के 19 जिलों को सुरक्षा जोखिमों और संवेदनशीलता के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है:
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A कैटेगरी: इसमें केवल 1 जिला शामिल है, जो अत्यधिक संवेदनशील माना गया है। यहां पर सुरक्षा बलों की अधिक तैनाती और उच्च स्तरीय निगरानी रखी जाएगी।
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B कैटेगरी: इसमें 16 जिले शामिल हैं। ये जिले मध्यम स्तर के संवेदनशील माने गए हैं, लेकिन इन पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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C कैटेगरी: इसमें 2 जिले हैं, जो अपेक्षाकृत कम संवेदनशील हैं, परंतु फिर भी इनमें मॉक ड्रिल के जरिए सुरक्षा व्यवस्था को जांचा जाएगा।

प्रशासन की तैयारी
पुलिस महानिदेशक ने यह भी स्पष्ट किया कि हर जिले में मॉक ड्रिल के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं और इन अभ्यासों में स्थानीय पुलिस, एंटी-टेरर स्क्वाड (ATS), बम निरोधक दस्ते और आपातकालीन सेवाएं शामिल रहेंगी। सभी ड्रिल्स का मूल्यांकन किया जाएगा और कमियों की पहचान कर उन्हें समय रहते दूर किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश में इस तरह की मॉक ड्रिल्स सुरक्षा तंत्र को न केवल तैयार रखती हैं, बल्कि आम नागरिकों में भी जागरूकता लाने का कार्य करती हैं। इस अभ्यास से यह तय किया जा सकता है कि राज्य किसी भी आपदा या खतरे से निपटने में सक्षम है या नहीं। राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की यह पहल निश्चित रूप से सराहनीय है।












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