धराली त्रासदी: उत्तरकाशी में बादल फटने से मची तबाही, 5 की मौत, केरल के 28 पर्यटक लापता
उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले में स्थित धराली गांव एक बार फिर प्राकृतिक कहर का शिकार हो गया है। मंगलवार की रात जब सभी लोग रोज़मर्रा की थकान के बाद सुकून की नींद लेने की तैयारी कर रहे थे, तभी बादल फटने की भयंकर आवाज़ ने सबको झकझोर कर रख दिया। इस cloudburst की वजह से पूरे क्षेत्र में तबाही का मंजर फैल गया, और अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। साथ ही सबसे चिंताजनक खबर यह है कि केरल से आए 28 पर्यटक लापता बताए जा रहे हैं।
❖ तबाही का मंजर – धराली की तस्वीरें कर रही हैं भावुक
धराली, जो अपने शांत वातावरण और प्रकृति की गोद में बसे पर्यटन स्थलों के लिए जाना जाता है, आज मलबे, कीचड़ और टूटे हुए घरों का साक्षी बना है। तेज़ बारिश के साथ आए मलबे ने कई घरों को पूरी तरह बहा दिया। कई वाहन, दुकानों और पुलों को नुकसान पहुंचा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह हादसा देर रात करीब 2:30 बजे हुआ। नींद में डूबे लोग जब तेज़ आवाज़ और पानी की धार से जगे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। भागदौड़ और चीख-पुकार के बीच कई लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा।


❖ रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं एजेंसियां
घटनास्थल पर भारतीय सेना, ITBP (इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस) और SDRF (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल) की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी हुई हैं। मलबे में दबे लोगों को खोजने के लिए डॉग स्क्वॉड और ड्रोन की मदद ली जा रही है। हेली-कॉप्टर से भी स्थिति का जायजा लिया गया है।
एसडीआरएफ के एक अधिकारी ने जानकारी दी कि लापता लोगों की तलाश के लिए 24 घंटे का राहत अभियान चलाया जा रहा है और प्राथमिकता उन पर्यटकों की है जो केरल से आए थे और स्थानीय गेस्ट हाउस में ठहरे हुए थे।
❖ पर्यावरणीय असंतुलन की चेतावनी?
यह घटना एक बार फिर हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हिमालयी क्षेत्र में लगातार हो रहे निर्माण कार्य, वनों की कटाई और जलवायु परिवर्तन के चलते किस प्रकार प्राकृतिक आपदाएं बढ़ती जा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण बारिश के पैटर्न में बदलाव आया है और cloudburst जैसी घटनाएं अब अधिक बार देखने को मिल रही हैं।
❖ स्थानीय लोगों की पीड़ा
धराली की एक निवासी सविता रावत कहती हैं, “हमने कभी नहीं सोचा था कि ऐसी रात भी आएगी जब हमें अपने ही घर से जान बचाकर भागना पड़ेगा। हमारे बच्चों की किताबें, सामान, राशन – सब बह गया।” गांव के कई परिवार बेघर हो गए हैं और अस्थायी शिविरों में शरण लिए हुए हैं।
❖ केंद्र और राज्य सरकार की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर दुख जताते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राहत कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावितों को त्वरित सहायता और पुनर्वास दिया जाए।
❖ क्या आगे और खतरे हैं?
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि उत्तरकाशी और आसपास के क्षेत्रों में अगले 48 घंटों तक भारी बारिश की संभावना है। ऐसे में रेस्क्यू ऑपरेशन और चुनौतीपूर्ण हो सकता है। प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे न जाने और पहाड़ी इलाकों में सतर्क रहने की अपील की है।
धराली में बादल फटने की यह घटना एक भयावह याद बन गई है, जिसने कई जिंदगियों को बदल दिया। यह सिर्फ एक मौसम की मार नहीं, बल्कि हमारी नीतियों और पर्यावरण के साथ किए जा रहे खिलवाड़ का परिणाम भी है।
हमें अब सचेत होकर प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए मजबूत नीतियों, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और पर्यावरण की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
धराली त्रासदी: उत्तरकाशी में बादल फटने से मची तबाही, 5 की मौत, केरल के 28 पर्यटक लापता
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