पहलगाम हमले के गुनहगार को ‘शांति दूत’ बताकर अमेरिका ने पाकिस्तान को दिया सर्टिफिकेट, ट्रम्प का न्यू गेम प्लेन
कश्मीर के पहलगाम अटैक का ज़ख्म अभी भरा भी नहीं था कि एक चौंकाने वाली खबर आई। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर इन दिनों अमेरिका के दौरे पर हैं, और वहां अमेरिका ने पाकिस्तान को ‘शांति का दूत’ बताते हुए उसकी जमकर तारीफ की है। इससे न सिर्फ भारत में हैरानी हुई है बल्कि कई सवाल भी उठे हैं — क्या अमेरिका आतंक के खिलाफ अपनी नीति से पीछे हट रहा है?
🇵🇰 अमेरिका में आसिम मुनीर का दूसरा दौरा
यह आसिम मुनीर का अमेरिका का दूसरा आधिकारिक दौरा है। इस दौरान पाकिस्तान और अमेरिका के बीच संयुक्त बयान जारी किया गया।
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बयान में पाकिस्तान को दक्षिण एशिया में स्थिरता और शांति का सहयोगी बताया गया।
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आतंकवाद से लड़ाई में पाकिस्तान के योगदान का जिक्र किया गया।
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पाकिस्तान की कूटनीतिक और रणनीतिक भूमिका की प्रशंसा की गई।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका भूल गया है कि पाकिस्तान को कई बार आतंकियों के समर्थन का आरोप झेलना पड़ा है?

💣 पहलगाम अटैक और पाकिस्तान की भूमिका
हाल ही में कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में कई निर्दोष लोगों की जान गई। भारतीय जांच एजेंसियों ने शुरुआती सबूतों में हमले की साजिश पाकिस्तान में रचे जाने की ओर इशारा किया।
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हमले की योजना पाकिस्तान में बने आतंकी संगठनों ने तैयार की।
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फंडिंग और हथियार सप्लाई का लिंक भी पाकिस्तान से जुड़ा।
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भारत ने इस हमले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा की मांग की।
ऐसे में अमेरिका का पाकिस्तान को ‘शांति दूत’ कहना भारत के लिए कूटनीतिक झटका माना जा रहा है।
🇺🇸 अमेरिका का ‘डिप्लोमैटिक बैलेंस’ या डबल स्टैंडर्ड?
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका की यह बयानबाज़ी स्ट्रैटेजिक बैलेंस का हिस्सा हो सकती है।
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अमेरिका, अफगानिस्तान और चीन के मामले में पाकिस्तान को एक अहम खिलाड़ी मानता है।
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वॉशिंगटन पाकिस्तान के साथ सैन्य और आर्थिक सहयोग बनाए रखना चाहता है।
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लेकिन यह रुख भारत-अमेरिका संबंधों में अविश्वास पैदा कर सकता है।
भारत के लिए यह स्पष्ट संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी स्थायी नहीं होती, सिर्फ हित स्थायी होते हैं।
📰 संयुक्त बयान के अहम बिंदु
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पाकिस्तान को दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता का साझेदार बताया गया।
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आतंकवाद से लड़ने में पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना।
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दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग बढ़ाने का वादा किया।
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सैन्य प्रशिक्षण और खुफिया साझेदारी पर सहमति।
🔍 भारत की प्रतिक्रिया
अभी तक भारत की तरफ से इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विदेश नीति के जानकारों का कहना है कि भारत को
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अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के आतंकी संबंधों के सबूत और मजबूती से पेश करने होंगे।
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अमेरिका के साथ रणनीतिक संवाद में इस मुद्दे को प्राथमिकता देनी होगी।
🌐 कूटनीतिक असर
इस बयान का असर सिर्फ भारत-पाकिस्तान-अमेरिका त्रिकोण तक सीमित नहीं रहेगा।
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चीन, रूस और खाड़ी देशों की नज़र भी इस पर है।
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पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने इमेज वॉशिंग के लिए इस्तेमाल करेगा।
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भारत के लिए कूटनीतिक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
अमेरिका का पाकिस्तान को ‘शांति दूत’ कहना उस समय आया है जब भारत ने पहलगाम हमले के पीछे पाकिस्तान की भूमिका के सबूत पेश किए हैं। यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जटिल समीकरणों को दिखाता है, जहां सच्चाई से ज्यादा रणनीतिक हित मायने रखते हैं। भारत के लिए अब यह ज़रूरी है कि वह अपने कूटनीतिक और अंतरराष्ट्रीय दबाव को और मज़बूत करे, ताकि आतंकवाद पर दोहरे मापदंड रखने वाले देशों को बेनकाब किया जा सके।
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