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पाकिस्तान में ऑपरेशन सरबाकफ:, 55 हजार लोगों का पलायन, 27 इलाकों में कर्फ्यू , क्या हैं पूरी खबर जानिए

पाकिस्तान में ऑपरेशन सरबाकफ

पाकिस्तान में ऑपरेशन सरबाकफ: TTP के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 55 हजार लोगों का पलायन, 27 इलाकों में कर्फ्यू


पाकिस्तान के बाजौर जिले में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। पाकिस्तान आर्मी ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है, जिसे ऑपरेशन सरबाकफ नाम दिया गया है। यह ऑपरेशन मुख्य रूप से लोई मामुंड और वार मामुंड तहसीलों में चलाया जा रहा है — ये वही इलाके हैं जो कभी TTP का गढ़ माने जाते थे।

इस ऑपरेशन की शुरुआत के साथ ही पाकिस्तान आर्मी ने 27 इलाकों में 72 घंटे का कर्फ्यू लगा दिया है, ताकि TTP के आतंकियों के मूवमेंट को पूरी तरह रोका जा सके। हालांकि, इस सैन्य कार्रवाई का असर आम नागरिकों पर भी पड़ा है, और करीब 55 हजार लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं


ऑपरेशन सरबाकफ क्यों?

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में TTP की गतिविधियाँ पिछले कुछ महीनों में तेज़ हुई हैं। बाजौर जिला, जो अफगानिस्तान से सटा हुआ है, लंबे समय से TTP के ठिकानों के लिए जाना जाता है।

सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में TTP के कुछ बड़े कमांडरों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिली थी। इसके बाद पाकिस्तान आर्मी ने बिना देरी किए ऑपरेशन शुरू करने का फैसला लिया। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य है:

  • TTP के ठिकानों को ध्वस्त करना

  • मुख्य नेताओं को गिरफ्तार या समाप्त करना

  • आतंकियों के सप्लाई नेटवर्क को काटना


कर्फ्यू और पलायन की स्थिति

ऑपरेशन सरबाकफ के ऐलान के साथ ही 27 इलाकों में सख्त कर्फ्यू लागू किया गया। इन इलाकों में आम लोगों के आने-जाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

हालात इतने बिगड़े कि लोगों को अपना सामान छोड़कर सुरक्षित इलाकों में जाना पड़ा। अब तक 55,000 से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ चुके हैं, जिनमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं। राहत कैंपों में इन्हें अस्थायी शरण दी जा रही है, लेकिन हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।


TTP का अतीत और बाजौर की अहमियत

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) की स्थापना 2007 में हुई थी, और इसका उद्देश्य पाकिस्तान में शरीयत कानून लागू करना बताया जाता है। बाजौर जिला हमेशा से TTP के लिए रणनीतिक रूप से अहम रहा है, क्योंकि यह अफगानिस्तान की सीमा से जुड़ा है और वहां से हथियार और लड़ाके लाना आसान होता है।

पिछले दशक में पाकिस्तानी सेना ने कई बार यहां ऑपरेशन चलाए, लेकिन TTP बार-बार अपनी जड़ें जमा लेती है। यही वजह है कि इस बार ऑपरेशन सरबाकफ को “पूर्ण सफाई अभियान” के तौर पर देखा जा रहा है।


लोगों की मुश्किलें

पलायन करने वालों में से कई लोगों ने मीडिया से कहा कि उन्होंने रातों-रात अपना घर छोड़ दिया।

“हमारे पास समय नहीं था। गोलीबारी और धमाके लगातार हो रहे थे। हम सिर्फ अपने बच्चों को लेकर भागे।” — एक स्थानीय निवासी

कई परिवारों के पास पर्याप्त खाना-पानी नहीं है। राहत सामग्री भेजी जा रही है, लेकिन पहाड़ी इलाकों में पहुंचाना मुश्किल हो रहा है।


अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

अब तक पाकिस्तान सरकार ने इस ऑपरेशन को “आंतरिक सुरक्षा” का मामला बताया है। हालांकि, अफगानिस्तान से लगी सीमा पर इस तरह की कार्रवाई से कूटनीतिक तनाव भी बढ़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने पाकिस्तान से अपील की है कि वह नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे। वहीं, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर ऑपरेशन सफल रहा तो TTP की ताकत को बड़ा झटका लगेगा, लेकिन इसके लिए लंबे समय तक स्थायी सैन्य उपस्थिति जरूरी होगी।


आगे की चुनौती

ऑपरेशन सरबाकफ अभी शुरुआती चरण में है। सेना का कहना है कि तब तक अभियान जारी रहेगा जब तक सभी आतंकियों को खत्म नहीं कर दिया जाता। लेकिन, यह भी सच है कि TTP जैसी संगठन जमीन के नीचे नेटवर्क बनाकर लंबे समय तक छिपे रह सकते हैं।

स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार सेना सिर्फ ऑपरेशन करके नहीं, बल्कि स्थायी सुरक्षा व्यवस्था करके ही लौटे।ऑपरेशन सरबाकफ पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी रणनीति में एक बड़ा कदम है। हालांकि, इस अभियान की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह TTP की जड़ों को कितनी गहराई से खत्म कर पाता है। साथ ही, नागरिकों को सुरक्षित घर लौटाना और उनकी जिंदगी को सामान्य बनाना भी उतना ही जरूरी है।

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Author: newsviewss

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