राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोप पर भारत का के चुनाव आयोग की दो टूक जवाब दे दिया “ये संविधान का अपमान”
Election Commission on Vote Theft Allegations:
भारत में लोकतंत्र की सबसे मज़बूत नींव संविधान और चुनाव प्रक्रिया है। लेकिन जब इस पर लगातार सवाल उठाए जाते हैं, तो इसकी गरिमा और मजबूती पर चोट पहुंचती है। हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने वोट चोरी के आरोपों पर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह केवल चुनाव आयोग ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय संविधान का अपमान है।
‘7 दिन में हलफनामा नहीं दिया तो…’, राहुल गांधी को चुनाव आयोग की दो टूक, कहा- देश से माफी मांगनी होगी
ECI: राहुल गांधी के आरोपों का जिक्र करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि हम शांत नहीं रह सकते हैं. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को हलफनामा देना होगा या देश से माफी मांगनी होगी.
उन्होंने साफ किया कि चुनाव आयोग का गठन और उसका पूरा तंत्र संविधान और कानून की रूपरेखा के तहत काम करता है। अगर हर पार्टी का जन्म चुनाव आयोग की पंजीकरण प्रक्रिया से होता है, तो फिर आयोग पर पक्षपात या धांधली का आरोप लगाना, जनता के भरोसे को तोड़ने जैसा है।

क्यों उठ रहे हैं सवाल?
भारत में हर चुनाव के बाद हारने वाले दल की ओर से वोट चोरी, EVM हैकिंग या गड़बड़ी के आरोप लगना आम हो गया है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक, यह मुद्दा ज़ोर-शोर से उठाया जाता है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या इन आरोपों के पीछे कोई ठोस सबूत भी मौजूद हैं?
चुनाव आयोग बार-बार यह साफ कर चुका है कि भारत की EVM मशीनें पूरी तरह सुरक्षित हैं, इंटरनेट से नहीं जुड़ी हैं और इनमें छेड़छाड़ की कोई संभावना नहीं है।
CEC ज्ञानेश कुमार का बयान
ज्ञानेश कुमार ने अपने बयान में कहा:
“चुनाव आयोग किसी राजनीतिक दल का दुश्मन या दोस्त नहीं है। हमारा काम केवल कानून और संविधान के दायरे में रहकर चुनाव कराना है। अगर कोई संस्था हर पार्टी को जन्म देती है, तो वह किसी के खिलाफ पक्षपात कैसे कर सकती है?”
उन्होंने आगे कहा कि बार-बार “वोट चोरी” का मुद्दा उठाना, जनता के बीच भ्रम फैलाना और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश है।
चुनाव आयोग की विश्वसनीयता
भारत का चुनाव आयोग दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक संस्थानों में से एक है।
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हर चुनाव में लाखों अधिकारी और कर्मचारी निष्पक्षता से काम करते हैं।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की चुनाव प्रणाली को पारदर्शी और विश्वसनीय माना जाता है।
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VVPAT मशीनें इस पारदर्शिता को और मज़बूत करती हैं, जिससे मतदाता यह देख सके कि उसका वोट सही उम्मीदवार को ही गया है।
इसके बावजूद, चुनाव आयोग को बार-बार आरोपों और अविश्वास का सामना करना पड़ता है।
राजनीतिक दलों की भूमिका
लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बेहद अहम होती है। विपक्ष का काम केवल सरकार को चुनौती देना नहीं, बल्कि जनता के सामने सकारात्मक मुद्दे रखना भी है।
लेकिन जब विपक्ष केवल चुनावी हार को “धांधली” बताकर समझाने लगता है, तो इससे जनता का भरोसा चुनावी प्रक्रिया से उठ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हार-जीत लोकतंत्र का हिस्सा है, और पार्टियों को जनता के बीच विश्वास कायम करने के लिए अपनी नीतियों पर ध्यान देना चाहिए, न कि केवल चुनाव आयोग पर उंगली उठानी चाहिए।
वोट चोरी के आरोप – संविधान पर सवाल
मुख्य चुनाव आयुक्त का बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि बार-बार लगाए जाने वाले “वोट चोरी” के आरोप केवल चुनाव आयोग की साख को नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि संविधान की गरिमा को भी ठेस पहुंचाते हैं।
भारत का संविधान चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष संस्था बनाता है। ऐसे में इस पर सवाल उठाना, संविधान में निहित लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने जैसा है।
जनता का विश्वास ज़रूरी
लोकतंत्र की असली ताकत जनता का विश्वास है। अगर जनता को यह भरोसा हो कि उसका वोट सही जगह पहुंच रहा है, तभी लोकतंत्र मज़बूत होगा।
इसीलिए चुनाव आयोग लगातार नई तकनीकों और पारदर्शी प्रक्रियाओं को अपनाता है।
ज्ञानेश कुमार का यह बयान जनता को आश्वस्त करने वाला है कि आयोग न केवल निष्पक्ष है, बल्कि किसी भी तरह की धांधली की गुंजाइश ही नहीं छोड़ता।
चुनाव जीतना या हारना राजनीति का हिस्सा है। लेकिन वोट चोरी के झूठे आरोप लगाना लोकतंत्र की जड़ों को खोखला करता है।
चुनाव आयोग की दो-टूक साफ कर देती है कि इस तरह के आरोप अब बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में, जहां 90 करोड़ से अधिक मतदाता हैं, वहां चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और भरोसेमंद बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। और इस चुनौती को चुनाव आयोग अब तक सफलतापूर्वक निभाता आया है।
आख़िरकार, लोकतंत्र की असली जीत तभी होगी, जब सभी दल जनता के जनादेश को ईमानदारी से स्वीकार करेंगे।
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⁃ theguardian.com thetimes.co.uk theaustralian.com.au












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