पीएम मोदी चीन दौरा: SCO शिखर सम्मेलन में एक मंच पर मोदी, शी जिनपिंग, पुतिन और शहबाज शरीफ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चीन दौरा लगातार सुर्खियों में है. इस बार SCO शिखर सम्मेलन के ग्रुप फोटो सेशन ने सबका ध्यान खींचा, जहां पीएम मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ एक ही मंच पर नजर आए. यह पल एशियाई राजनीति और वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.
SCO शिखर सम्मेलन की अहमियत
शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) एशिया का सबसे बड़ा क्षेत्रीय संगठन माना जाता है. इसमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान और मध्य एशियाई देश शामिल हैं. यह मंच सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा के लिए अहम है. इस बार का सम्मेलन इसलिए खास रहा क्योंकि दुनिया आज ऊर्जा संकट, वैश्विक मंदी और भू-राजनीतिक तनाव से जूझ रही है.
ग्रुप फोटो सेशन पर सबकी नजर
ग्रुप फोटो सेशन के दौरान मोदी, जिनपिंग, पुतिन और शहबाज एक साथ दिखाई दिए. यह दृश्य अपने आप में बहुत कुछ कहता है. भारत और चीन के बीच सीमा विवाद, भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार तनाव और रूस पर पश्चिमी देशों का दबाव—इन सबके बीच इन नेताओं का एक मंच पर होना बड़ी बात है.
पीएम मोदी-शी जिनपिंग मुलाकात
इस दौरे में पीएम मोदी और शी जिनपिंग की अलग बैठक भी हुई. इस दौरान मोदी ने सीमा पर शांति बनाए रखने, आपसी सहयोग बढ़ाने और व्यापार में संतुलन पर जोर दिया. दोनों नेताओं ने इस बात को स्वीकार किया कि भारत-चीन के रिश्ते एशिया की स्थिरता और विकास के लिए बेहद अहम हैं.
पुतिन से बातचीत
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी पीएम मोदी ने मुलाकात की. इस बातचीत में ऊर्जा सहयोग, रक्षा साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर चर्चा हुई. भारत और रूस दशकों पुराने रणनीतिक साझेदार हैं और मौजूदा दौर में दोनों देशों का रिश्ता और भी अहम हो गया है.
शहबाज शरीफ की मौजूदगी
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी SCO सम्मेलन में मौजूद रहे. हालांकि मोदी और शहबाज के बीच कोई औपचारिक बैठक नहीं हुई, लेकिन दोनों का एक मंच पर आना भी अपने आप में बड़ा संदेश है. यह दिखाता है कि क्षेत्रीय चुनौतियों के बावजूद संवाद की संभावना हमेशा बनी रहती है.
अंतरराष्ट्रीय संदेश
इस पूरे आयोजन का बड़ा संदेश यह है कि एशिया के बड़े देश अब भी साझा मुद्दों पर एक साथ बैठकर चर्चा करने को तैयार हैं. ट्रंप और पश्चिमी देशों के टैरिफ और दबाव के बीच यह तस्वीर बताती है कि एशियाई देश अपनी स्वतंत्र रणनीति अपनाना चाहते हैं. भारत, चीन और रूस की नजदीकी अमेरिका और यूरोप के लिए भी एक संकेत है कि शक्ति संतुलन में बदलाव आ रहा है.
जनता की उम्मीदें
भारत में लोग इस दौरे से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सीमा विवाद पर कुछ सकारात्मक कदम उठेंगे और व्यापार में सुधार होगा. वहीं, रूस और चीन की जनता के लिए भी यह सम्मेलन महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उनके देशों को अंतरराष्ट्रीय सहयोग और नए अवसर मिल सकते हैं.
पीएम मोदी का चीन दौरा और SCO शिखर सम्मेलन इस बात का प्रतीक है कि वैश्विक राजनीति में एशिया की भूमिका लगातार बढ़ रही है. मोदी, जिनपिंग, पुतिन और शहबाज का एक मंच पर आना केवल तस्वीर भर नहीं, बल्कि एक संदेश है कि एशिया संवाद और सहयोग के जरिए अपनी दिशा तय करना चाहता है. अब सबकी निगाहें इस सम्मेलन से निकलने वाले ठोस नतीजों पर टिकी रहेंगी.
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⁃ theguardian.com thetimes.co.uk theaustralian.com.au













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