महागठबंधन में सीट शेयरिंग पर घमासान: लालू यादव कांग्रेस को 50 से ज्यादा सीटें देने को तैयार नहीं, अब अखिलेश यादव निकालेंगे नया फॉर्मूला!
बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही महागठबंधन (Mahagathbandhan) के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर हलचल तेज हो गई है। जहां एक ओर कांग्रेस अपने लिए ज्यादा सीटों की मांग पर अड़ी हुई है, वहीं आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव 50 से ज्यादा सीटें देने को तैयार नहीं हैं। इसी बीच सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी यादव आज देर शाम दिल्ली रवाना हो सकते हैं ताकि इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर समाधान निकाला जा सके।
क्या हुआ और कब हुआ
यह पूरा मामला तब तूल पकड़ गया जब कांग्रेस ने बिहार की लगभग 90 विधानसभा सीटों पर दावेदारी जताई। कांग्रेस का तर्क था कि राज्य में उसके पारंपरिक वोट बैंक और पिछले चुनाव के प्रदर्शन को देखते हुए यह संख्या जायज है। लेकिन आरजेडी का मानना है कि ग्राउंड रियलिटी बदल चुकी है, और गठबंधन को “जमीनी समीकरण” के आधार पर सीटों का बंटवारा करना चाहिए।
बीते हफ्ते पटना में हुई महागठबंधन की बैठक में जब यह मुद्दा उठा, तो माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया। कांग्रेस के प्रतिनिधि दल ने कहा कि पार्टी को कम सीटें मिलने पर वह स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने पर विचार कर सकती है। वहीं, लालू यादव ने स्पष्ट कहा कि “संतुलन जरूरी है, हर किसी को अपनी हैसियत के हिसाब से सीटें मिलेंगी।”
क्यों नहीं बन पा रही बात
महागठबंधन में फिलहाल तीन प्रमुख पार्टियां — राजद, कांग्रेस और वाम दल शामिल हैं। लेकिन सबसे बड़ा खिलाड़ी राजद है, जो चाहता है कि उसे कम से कम 140 सीटों पर मौका मिले, जबकि कांग्रेस और वाम दल बाकी सीटों में हिस्सा लें।
लालू यादव का कहना है कि कांग्रेस का ग्राउंड नेटवर्क कमजोर हुआ है, इसलिए ज्यादा सीटें देना राजनीतिक रूप से जोखिम भरा होगा।
दूसरी ओर, कांग्रेस के भीतर यह धारणा है कि बिहार में बिना कांग्रेस के वोट बैंक के महागठबंधन का समीकरण अधूरा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता मानते हैं कि यदि कांग्रेस को पर्याप्त सीटें नहीं मिलतीं, तो वह “छोटे भाई की भूमिका में नहीं रहेगी।”
अब अखिलेश यादव का फॉर्मूला
सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश यादव ने इस गतिरोध को सुलझाने के लिए एक नया “सीट एडजस्टमेंट फॉर्मूला” सुझाया है। उनके प्रस्ताव के मुताबिक, बिहार की सीटों का बंटवारा पिछले चुनावों के वोट प्रतिशत और मौजूदा जनाधार के हिसाब से होना चाहिए। यानी जिन दलों ने 2020 के चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया था, उन्हें उसी अनुपात में सीटें दी जाएं।
अगर यह फॉर्मूला स्वीकार होता है, तो कांग्रेस को 50–55 सीटों, राजद को 140–150 सीटों, और वाम दलों को 20 सीटों के आसपास हिस्सेदारी मिल सकती है।
तेजस्वी की दिल्ली यात्रा और आगे की रणनीति
महागठबंधन के अंदर बढ़ती खींचतान को देखते हुए तेजस्वी यादव आज शाम दिल्ली रवाना होंगे। वहां उनकी मुलाकात राहुल गांधी और अखिलेश यादव से हो सकती है। इस बैठक में सीट बंटवारे पर अंतिम फैसला या समझौते की रूपरेखा तय हो सकती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर इस बार भी सीट शेयरिंग पर सहमति नहीं बन पाई, तो महागठबंधन कमजोर स्थिति में चुनाव मैदान में उतरेगा, जिससे एनडीए को सीधा फायदा मिल सकता है।
बिहार की राजनीति हमेशा से समीकरणों और गठबंधनों की बिसात पर टिकी रही है। इस बार भी वही कहानी दोहराई जा रही है। महागठबंधन के भीतर अगर सीटों की खींचतान लंबी चली, तो इसका असर न सिर्फ चुनाव नतीजों पर पड़ेगा बल्कि विपक्षी एकजुटता की पूरी रणनीति पर भी प्रश्नचिह्न लग सकता है।
अब निगाहें तेजस्वी यादव की दिल्ली यात्रा पर टिकी हैं — क्या वे कांग्रेस और लालू यादव के बीच की खाई पाट पाएंगे या महागठबंधन एक और राजनीतिक मोड़ पर पहुंचने वाला है, यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा।
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