अहमदाबाद में हुए प्लेन हादसे(Ahmedabad Plane Crash ) में अब तक 297 लोगों की मौत की पुष्टि हो गई है। विमान में सवार 242 लोगों में से 241 लोगों की मौत हो गई है। मृतकों में 229 लोग यात्री थे, जबकि 12 विमान के क्रू मैंबर्स थे। इसके अलावा प्लेन क्रैश करने के बाद जिस मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल पर गिरा था वहां मौजूद 56 लोगों की भी जान चली गई है। हादसे में सिर्फ एक यात्री की जान बच पाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हादसे वाली जगह पहुंचे जायजा लिया फिर वो सिविल हॉस्पिटल भी गए वहां उन्होंने जीवित बचे एकमात्र व्यक्ति से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना।
विमान हादसे में जीवित बचे एकलौते शख्स हैं रमेश
रमेश विश्वास कुमार इकलौते ऐसे शख्स हैं, जिन्हें मौत छूकर निकल गई। 40 वर्षीय रमेश विश्वासकुमार एक ब्रिटिश नागरिक हैं। वह विमान(Ahmedabad Plane Crash) के मलबे से खुद बाहर निकलकर चलते हुए नजर आए। वो प्लेन की सीट नंबर 11A पर बैठे थे। रमेश का वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल है इस भयावह दुर्घटना में रमेश कैसे बच गए। कैसे उनकी किस्मत ने साथ दिया। विश्वास का बचना किसी चमत्कार से कम नहीं है. जब प्लेन के मलबे से उन्हें लोगों से खुद चलकर बाहर आते देखा, तो पहले तो किसी को भी यकीन नहीं हुआ। फिर खुद विश्वास ने बताया कि आखिर वह कैसे इससे बच पाए।
किसी ने मुझे ढूंढ़कर एंबुलेंस में बिठाया-रमेश
विश्वास की शुरुआत में पहचान 11A पर बैठे यात्री के रूप में की गई थी। विश्वास ने बतया, ‘उड़ान भरने के कुछ सेकंड बाद ही हमने उसकी तेज आवाज सुनी। सभी डर गए और हम सब घबराकर चिल्लाने लगे। जल्द ही, मैंने खुद को लाशों के बीच पाया। चारों तरफ मलबा था। मैं डर गया और भागा और किसी ने मुझे ढूंढ़कर एंबुलेंस में बिठाया। उन्होंने आगे बताया, ‘सब मेरी नजरों के सामने हुआ था लेकिन मुझे खुद नहीं पता कि आखिर कैसे मैं जीवित बच गया हूं। थोड़े टाइम के लिए मुझे लगता था कि मैं भी मरने वाला हूं। लेकिन आंख खुली तो मैं जिंदा था। मैंने अपनी सीट बेल्ट निकालने की कोशिश की। इसके बाद मैं वहां से निकल गया। मेरी आंखों के सामने एयरहोस्टेज और दूसरे लोग मर गए थे टेकऑफ के बाद 5-10 सेकेंड के अंदर ही सबकुछ हो गया।’
‘शायद मैं सीट सहित नीचे गिर गया था’
विश्वास ने बताया कि वह फ्लाइट के जिस हिस्से में थे वह हिस्सा हॉस्टल के ग्राउंड फ्लोर पर लैंड(Ahmedabad Plane Crash ) हुई थी। वह जिस तरफ बैठे थे उस तरफ थोड़ा स्पेस था और इसलिए वह निकल सके। उन्होंने बताया कि मेरी सीट प्लेन के जिस हिस्से में थी, वो बिल्डिंग के निचले हिस्से से टकराया होगा। ऊपर के हिस्से में आग लग गई थी, कई लोग वहीं फंसे रह गए। शायद मैं सीट सहित नीचे गिर गया था। मैं जैसे-तैसे निकल पाया। दरवाजा टूट गया था, और सामने कुछ खाली जगह दिखी, तो निकलने की कोशिश की। वे बताते हैं कि दूसरी साइड पर दीवार थी, वहां से शायद कोई नहीं निकल सका। जिस समय आग लगी उनका बांया हाथ जल गया था और उन्हें लोग एंबुलेंस में लेकर आए। रमेश अपना बोर्डिंग पास पकड़े हुए और वह भी पूरी तरह से सुरक्षित था।
दो दशकों से लंदन में रह रहे हैं रमेश
रमेश विश्वास ने बताया कि उनकी आंखों के सामने ही दो एयर होस्टेस, एक अंकल-आंटी और सबकुछ जल रहा था। इस हादसे में विश्वास का बायां हाथ बुरी तरह जल गया, लेकिन जान बच गई। वह बताते हैं कि जैसे ही बाहर आया, आग फैल रही थी. कुछ सेकंड और देर होती तो शायद इस दुनिया में नहीं होते। उन्होंने बताया कि वह पिछले दो दशकों से लंदन में रह रहे हैं। हाल ही में वह अपने भाई अशोक के साथ भारत आए थे। रमेश और उनके भाई अशोक गुजरात बॉर्डर पर स्थित केंद्र शासित प्रदेश दीव गए थे और वापस लौट रहे थे।
Author: Mukul Dwivedi
I graduated From the University of Allahabad and PG diploma in Mass communication From Government Polytechnic Lucknow. After study worked with Bharat samachar as Trainee Producer. Currently I am working With Ekal Bharat as a Producer.












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