यूपी के हाथरस में हुई घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। जहां फुलरई गांव में एक धार्मिक समागम में मची भगदड़ में 120 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। मरने वालों में ज्यादातर बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं हैं। हाल के सालों में ये सबसे बड़ी त्रासदी है। भगदड़ उस समय हुई, जब लोग भोले बाबा के चरणों की धूल लेने को टूट पड़े। वॉलंटियर्स ने वाटर कैनन से पानी की बौछार की। लोग फिसले और जमीन पर गिरे, फिर एक-दूसरे को रौंदते हुए निकल गए। हादसे के बाद भोले बाबा फरार हो गया। हादसे के 17 घंटे बाद भी पुलिस को उसकी लोकेशन नहीं मिली है।पुलिस ने बाबा को छोड़ सेवादारों और उनके करीबियों के साथ कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। ऐसे में सवाल उठ रहे है कि आखिर में कौन हैं भोले बाबा, जिनके सत्संग में इतना बड़ा हादसा हुआ है।
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पुलिस की नौकरी छोड़ सूरजपाल बना भोले बाबा
संत भोले बाबा मूल रूप से कासगंज के पटियाली गांव के रहने वाला हैं। पहले वह उत्तर प्रदेश पुलिस में भर्ती हुआ लेकिन 18 साल की नौकरी के बाद वीआरएस ले लिया। पुलिस सेवा से मुक्ति के बाद सूरजपाल जाटव अपने गांव नगला बहादुरपुर पहुँचे, जहाँ कुछ दिन रुकने के बाद उन्होंने ईश्वर से संवाद होने का दावा किया और ख़ुद को भोले बाबा के तौर पर स्थापित करने की दिशा में काम शुरू किया। कुछ सालों के अंदर ही उनके भक्त उन्हें कई नामों से बुलाने लगे और इनके बड़े-बड़े आयोजन शुरू हो गए, जिनमें हज़ारों लोग शरीक होने लगे।
75 साल के सूरजपाल जाटव उर्फ़ भोले बाबा तीन भाई हैं। सबसे बड़े सूरजपाल है, दूसरे नंबर पर भगवान दास हैं, जिनकी मौत हो चुकी है जबकि तीसरे नंबर पर राकेश कुमार हैं, जो पूर्व में ग्राम प्रधान भी रह चुके हैं। इस बात की पुष्टि हुई है कि अपने गाँव में अब बाबा का आना-जाना कम रहता है। हालांकि बहादुरपुर गांव में उनका चैरिटेबल ट्रस्ट अब भी सक्रिय है। अपने सत्संगों में नारायण साकार ने यह दावा कई दफ़ा किया है कि उन्हें यह नहीं मालूम कि सरकारी सेवा से यहां तक खींचकर कौन लाया।
भोले बाबा का विवादों से रहा है पुराना नाता
विश्व हरि भोले बाबा को अनुयायी भोले बाबा के नाम से पुकारते हैं। इनका विवादों से पुराना नाता रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कासगंज जिले के पटियाली स्थित बहादुर नगर के रहने वाले साकार विश्व हरि भोले बाबा ने 17 साल पहले पुलिस विभाग से नौकरी छोड़कर सत्संग शुरू किया था। भोले बाबा के अनुयायी उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान और मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में हैं। खास बात यह है कि इंटरनेट के जमाने में अन्य साधु सतों और कथावाचकों से इतर सोशल मीडिया से दूर हैं। बाबा का कोई आधिकारिक अकाउंट किसी भी प्लेटफॉर्म पर नहीं है।
कई राज्यों में भोले बाबा के लाखों अनुयायी
कथित भक्तों का दावा है कि नारायण साकार हरि यानी भोले बाबा के जमीनी स्तर पर खासे अनुयायी हैं। पश्चिमी यूपी के अलीगढ़, हाथरस जिलों में भी नारायण साकार हरि का कार्यक्रम हर मंगलवार को आयोजित किया जाता है। इसमें हजारों की तादाद में भीड़ उमड़ती है। इस दौरान भोले बाबा से जुड़े हजारों स्वयंसेवक और स्वयंसेविकाएं खाने पीने से लेकर भक्तों के लिए जरूरी इंतजाम करते हैं। कोरोनाकाल के दौरान प्रतिबंध के बावजूद भी भोले बाबा हजारों की भीड़ इकट्ठा करके चर्चा में आए थे।
भगवान से साक्षात्कार के बाद आध्यत्म की ओर आने का दावा
संत भोले बाबा के मुताबिक, मेरा कोई गुरु नहीं है। मुझे ईश्वर से बेहद लगाव हैं। एक बार उनका अहसास हुआ था।उसके बाद मैंने अपनी पूरी जिंदगी मानव कल्याण में लगा दी। संत भोले बाबा के लाखों अनुयायी हैं। वीआरएस लेने के बाद उन्हें अचानक भगवान से साक्षात्कार हुआ और उसी समय से उनका झुकाव आध्यात्म की ओर हो गया। भगवान की प्रेरणा से उन्होंने जान लिया कि यह शरीर उसी परमात्मा का अंश है।
Author: Mukul Dwivedi
I graduated From the University of Allahabad and PG diploma in Mass communication From Government Polytechnic Lucknow. After study worked with Bharat samachar as Trainee Producer. Currently I am working With Ekal Bharat as a Producer.













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