PM मोदी ने 5 घंटे के अंदर पाकिस्तान के खिलाफ… डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर क्या बोले राहुल गांधी?
भारत-पाकिस्तान के रिश्तों को लेकर एक बार फिर सियासी घमासान छिड़ गया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने 2019 में भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को सिर्फ 5 घंटे के अंदर खत्म कर दिया था। उनका कहना है कि उन्होंने “ट्रेड और टैरिफ की धमकी” देकर भारत को सीजफायर के लिए राजी किया। ट्रंप के इस बयान ने भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस पर सीधा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर ले लिया है।
ट्रंप का दावा और उसका बैकग्राउंड
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि पुलवामा हमले और बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया था, तब उन्होंने दखल दिया। ट्रंप का कहना है कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान से बात की और सिर्फ पांच घंटे के अंदर हालात सामान्य कर दिए।
उनका दावा है कि अगर वे बीच में नहीं आते, तो हालात और बिगड़ सकते थे। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि भारत-पाकिस्तान “खतरनाक युद्ध की ओर बढ़ रहे थे” और उन्होंने इसे रोक लिया।
भारत का जवाब
भारत ने पहले भी ऐसे दावों को कई बार खारिज किया है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े फैसले खुद करता है और किसी तीसरे देश की दखलअंदाजी की कोई जरूरत नहीं है।
भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, बालाकोट स्ट्राइक और उसके बाद की सैन्य तैयारियां पूरी तरह भारत की रणनीति का हिस्सा थीं और इनमें किसी विदेशी दबाव का कोई रोल नहीं था।
राहुल गांधी का हमला
डोनाल्ड ट्रंप के दावे के बाद राहुल गांधी ने इसे तुरंत राजनीतिक मुद्दा बना दिया। उन्होंने कहा कि अगर ट्रंप की बात सच है, तो यह भारत की संप्रभुता पर बड़ा सवाल है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा:
“क्या पीएम मोदी ने अमेरिका की धमकी के आगे झुककर पाकिस्तान पर नरमी दिखाई? अगर ट्रंप सही कह रहे हैं, तो देश को सच जानने का हक है।”
राहुल गांधी का सीधा निशाना इस बात पर है कि मोदी सरकार हमेशा “मजबूत नेतृत्व” और “कड़े फैसलों” की बात करती है, लेकिन अगर ट्रंप के दावे सच हैं, तो यह छवि पूरी तरह सवालों के घेरे में आ जाती है।
बीजेपी का पलटवार
भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस सिर्फ अफवाहों और विदेशी नेताओं के बयानों के सहारे राजनीति करना चाहती है। भाजपा का कहना है कि मोदी सरकार ने हर मौके पर पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया है और ट्रंप जैसे नेताओं के दावे “सस्ती पब्लिसिटी” से ज्यादा कुछ नहीं हैं।
ट्रंप का एजेंडा क्या है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप इस समय अमेरिका में चुनावी मोड में हैं और अक्सर पुराने किस्से उठाकर खुद को “डील मेकर” और “शक्तिशाली नेता” साबित करने की कोशिश करते हैं। भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता का दावा भी इसी पॉलिटिकल नैरेटिव का हिस्सा हो सकता है।
असल सवाल
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क्या वास्तव में अमेरिका ने भारत पर दबाव डाला था?
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क्या मोदी सरकार ने अपनी विदेश नीति में लचीलापन दिखाया?
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या फिर यह सिर्फ ट्रंप की चुनावी राजनीति का हिस्सा है?
इन सवालों के जवाब शायद कभी साफ न हो पाएं। लेकिन इतना तय है कि ट्रंप के इस बयान ने भारतीय राजनीति को फिर से गरमा दिया है।
नतीजा
यह विवाद सिर्फ भारत-पाकिस्तान रिश्तों का मामला नहीं है, बल्कि भारत की विदेश नीति, प्रधानमंत्री मोदी की छवि और विपक्ष की रणनीति से भी जुड़ा है। राहुल गांधी इस मुद्दे को भुनाने की पूरी कोशिश करेंगे, जबकि भाजपा इसे खारिज कर राष्ट्रवाद की राजनीति को मजबूत करने की कोशिश करेगी।
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह अपनी संप्रभुता और स्वायत्त विदेश नीति की छवि को बरकरार रखे। चाहे ट्रंप का दावा सच हो या झूठ, भारतीय जनता अब सिर्फ एक चीज चाहती है—कि देश के नेता किसी भी विदेशी दबाव से ऊपर उठकर फैसले लें।
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