US-India Relations: ‘रणनीतिक साझेदार बनकर रहना चाहता है भारत तो…’, अमेरिका ने दी टैरिफ वॉर के बीच बड़ी धमकी
India-US Trade Tensions:
भारत और अमेरिका के रिश्तों में एक बार फिर खटास नजर आने लगी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और उनके करीबी सलाहकार पीटर नवारो ने भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने और चीन के साथ सामान्य रिश्ते बनाए रखने पर कड़ी चेतावनी दी है. सवाल यह उठता है कि क्या भारत वास्तव में “रणनीतिक साझेदार” बनकर रह पाएगा या फिर यह साझेदारी केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगी?
📌 टैरिफ वॉर और अमेरिका की रणनीति
पिछले कुछ महीनों में अमेरिका ने भारत पर टैरिफ का बोझ बढ़ा दिया है.
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स्टील और एल्युमिनियम पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया।
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भारतीय टेक्सटाइल और आईटी प्रोडक्ट्स पर सख्ती बढ़ा दी गई।
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कृषि उत्पादों पर भी अमेरिकी बाजार में दिक्कतें खड़ी की जा रही हैं।
इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन चीन को राहत देता दिख रहा है. यही वजह है कि भारत को लेकर अमेरिका के “डबल स्टैंडर्ड” सवालों के घेरे में हैं.
⚡ पीटर नवारो का बड़ा बयान
ट्रंप प्रशासन के सलाहकार पीटर नवारो ने सीधे तौर पर कहा –
“अगर भारत वास्तव में अमेरिका का रणनीतिक साझेदार बनकर रहना चाहता है, तो उसे रूस से कच्चे तेल की खरीद और चीन से नजदीकी खत्म करनी होगी.”
इस बयान ने भारतीय कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है. क्योंकि भारत के लिए रूस पारंपरिक सहयोगी रहा है और चीन भले ही प्रतिद्वंद्वी हो, लेकिन व्यापार के मोर्चे पर भारत उसके साथ जुड़ा हुआ है.
🇮🇳 भारत की स्थिति
भारत दो पाटों के बीच फंसा हुआ है –
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रूस के साथ रक्षा और ऊर्जा सहयोग: भारत की रक्षा जरूरतों और ऊर्जा सुरक्षा में रूस अहम भूमिका निभाता है।
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चीन के साथ व्यापार: भारत और चीन के बीच वार्षिक व्यापार लाखों करोड़ रुपये का है।
अमेरिका का दबाव इस संतुलन को बिगाड़ सकता है. भारत ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा.
🌐 अमेरिका का असली मकसद
अमेरिका की पूरी रणनीति साफ है –
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वह चाहता है कि भारत पूरी तरह से पश्चिमी खेमे में आ जाए।
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रूस से ऊर्जा और हथियारों पर निर्भरता खत्म करे।
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चीन के साथ आर्थिक रिश्तों को कमजोर करे।
लेकिन सवाल यह है कि क्या यह भारत के लिए संभव है?
📊 भारत-अमेरिका संबंधों पर असर
इस धमकी का असर कई मोर्चों पर देखने को मिल सकता है –
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रक्षा सहयोग: अमेरिका भारत को अत्याधुनिक हथियार देने में शर्तें जोड़ सकता है।
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ट्रेड एग्रीमेंट: भारत-अमेरिका के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की राह और मुश्किल हो सकती है।
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राजनयिक दबाव: भारत पर संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दबाव बढ़ सकता है।
🛑 भारत के लिए आगे का रास्ता
भारत के लिए अब चुनौती यह है कि वह अमेरिका को नाराज किए बिना अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बरकरार रखे.
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भारत को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश तेज करनी होगी।
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चीन पर व्यापारिक निर्भरता कम करनी होगी।
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साथ ही रूस और अमेरिका दोनों के साथ संतुलन साधना होगा।
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का यह ताजा बयान भारत-अमेरिका रिश्तों में नई खाई खोद रहा है. भारत के सामने अब यह बड़ी चुनौती है कि वह अपनी राष्ट्रीय नीति पर कायम रहते हुए अमेरिका जैसी महाशक्ति को कैसे साधे.
स्पष्ट है कि आने वाले महीनों में भारत-अमेरिका रिश्ते और टैरिफ वॉर अंतरराष्ट्रीय राजनीति की सबसे बड़ी सुर्खियों में रहेंगे.
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