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क्या होता है Air Defence System? कैसे भारत के लिए रक्षा की ढाल बना S-400

Air Defence system

क्या होता है Air Defence System? कैसे भारत के लिए रक्षा की ढाल बना S-400

भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से आतंकियों पर हुए प्रहार के बाद पाकिस्तान ने लगातार दूसरे दिन गुरुवार रात को ड्रोन और मिसाइल से हमले किए, जिन्हें भारत ने S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम(Air Defence System) ने नाकाम कर दिया। पाकिस्तान ने भारत के कई शहरों पर हवाई हमले करने की कोशिश की लेकिन भारतीय वायुसेना और S-400 एयर डिफेंस सिस्टम (S 400 Air Defence System) ने उसकी इस नापाक चाल को पूरी तरह नाकाम कर दिया। इसके अलावा भारत ने पाकिस्तान के लाहौर में उसके एयर डिफेंस को हारोप ड्रोन की मदद से तबाह कर दिया। तो ऐसे में सवाल उठता है कि ये एयर डिफेंस सिस्टम होता क्या है और कैसे S-400 इस समय भारत की रक्षा का ढाल बना हुआ है?

क्या होता है एयर डिफेंस सिस्टम?

एयर डिफेंस सिस्टम (Indian Air Space Defence) एक ऐसा टेक्नोलॉजी और हथियारों का सेटअप है जो किसी मुल्क या इलाके को हवाई हमलों से बचाने के लिए इस्तेमाल होता है। ये हमले दुश्मन के जहाज (फाइटर जेट), मिसाइल, ड्रोन या रॉकेट से हो सकते हैं। इसका मकसद है आसमान से आने वाले खतरों को रोकना और अपनी सरजमीं को सुरक्षित रखना होता है।

एयर डिफेंस सिस्टम काम कैसे करता है?

दरअसल एयर डिफेंस सिस्टम(Air Defence System) कई तरीकों से देश को महफूज रखता है। जिनमें आम तौर पर रडार, संचार नेटवर्क और आने वाले खतरों का पता लगाने, ट्रैक करने और रोकने या नष्ट करने के लिए विभिन्न हथियार प्रणालियां शामिल होती हैं। सबसे पहले रडार दुश्मन के जहाज या मिसाइल को ढूंढता है। ये आसमान में नजर रखता है और फौरन खबर देता है। जब खतरा पकड़ा जाता है, तो एयर डिफेंस सिस्टम अपनी मिसाइल या तोपों से उसका पीछा करता है और उसे तबाह कर देता है। सारा सिस्टम एक कंट्रोल रूम से चलता है, जहां फौजी अफसर फैसला लेते हैं कि क्या करना है। मान लीजिए कोई दुश्मन का ड्रोन आपके शहर की तरफ आ रहा है। एयर डिफेंस सिस्टम का रडार उसे देख लेता है, फिर तेज़ी से एक मिसाइल छोड़ता है जो उस ड्रोन को हवा में ही उड़ा देता है। इस तरह शहर महफूज रहता है।

भारत का सुदर्शन S-400 कैसे बना रक्षा कवच?

S-400 एक एयर डिफेंस सिस्टम(Air Defence System) है, यानी ये हवा के जरिए हो रहे अटैक को रोकता है। ये दुश्मन देशों के मिसाइल, ड्रोन, राकेट लॉन्चर और फाइटर जेट्स के हमले को रोकने में कारगर है। इसे रूस के एलमाज सेंट्रल डिजाइन ब्यूरो ने बनाया है और दुनिया के बेहद आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम में इसकी गिनती होती है। भारत और रूस के बीच S-400 की 5 यूनिट के लिए 2018 में करीब 40 हजार करोड़ रुपए की डील हुई थी।

S-400 की खासियत क्या है?

S-400 की सबसे बड़ी खासियत इसका मोबाइल होना है। यानी रोड के जरिए इसे कहीं भी लाया ले जाया जा सकता है। इसमें 92N6E इलेक्ट्रॉनिकली स्टीयर्ड फेज्ड ऐरो रडार लगा हुआ है जो करीब 600 किलोमीटर की दूरी से ही मल्टीपल टारगेट्स को डिटेक्ट कर सकता है। ऑर्डर मिलने के 5 से 10 मिनट में ही ये ऑपरेशन के लिए रेडी हो जाता है।यह एक यूनिट से एक साथ 160 ऑब्जेक्ट्स को ट्रैक किया जा सकता है। एक टारगेट के लिए 2 मिसाइल लॉन्च की जा सकती हैं। इसमें 400 इस सिस्टम की रेंज को दर्शाता है। भारत को जो सिस्टम मिल रहा है, उसकी रेंज 400 किलोमीटर है। यानी ये 400 किलोमीटर दूर से ही अपने टारगेट को डिटेक्ट कर काउंटर अटैक कर सकता है। साथ ही यह 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर भी अपने टारगेट पर अटैक कर सकता है।

पाकिस्तान का HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम क्या है?

पाकिस्तान ने 14 अक्टूबर 2021 को HQ-9 AD मिसाइल सिस्टम को सेना में शामिल किया। इसे चीन की प्रिसीजन मशीनरी इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट कॉर्पोरेशन (CPMIEC) ने बनाया। यह लंबी दूरी तक सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम है। जिसे भारत के राफेल, सुखोई और ब्रह्मोस के हमलों को रोकने के लिए कराची और लाहौर जैसे शहरों में तैनात किया गया है।

HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम क्यों हुआ फेल?

ऑपरेशन सिंदूर में भारत की मिसाइलों ने बहावलपुर में सटीक हमले किए, जिन्हें रोकने में पाकिस्तान की HQ-9 प्रणाली पूरी तरह विफल रही।  इसके पीछे कई कारण हैं जैसे तकनीकी और रणनीति कमियां। HQ-9 का रडार सिस्टम भारत के S-400 के मल्टी-AESA रडार जितना उन्नत नहीं है. यह ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक मिसाइलों को ट्रैक तो कर सकता है, लेकिन उन्हें रोक नहीं पाता. 9 मार्च, 2022 को भारत की एक ब्रह्मोस मिसाइल गलती से पाकिस्तान के मियां चन्नू में गिर गई थी, जिसे HQ-9 ने ट्रैक तो किया, लेकिन उसे रोक नहीं सका। पाकिस्तान अपनी 95 प्रतिशत से ज्यादा सैन्य जरूरतों के लिए चीन पर निर्भर है। लेकिन चीनी हथियारों की गुणवत्ता पर अक्सर सवाल उठते रहते हैं। HQ-9 जैसी प्रणालियां सीमित युद्ध की स्थिति में भारत की उन्नत तकनीक का सामना नहीं कर सकतीं।

Mukul Dwivedi
Author: Mukul Dwivedi

I graduated From the University of Allahabad and PG diploma in Mass communication From Government Polytechnic Lucknow. After study worked with Bharat samachar as Trainee Producer. Currently I am working With Ekal Bharat as a Producer.

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